चंपारण की खबर::सावन में मेहंदी व हरे रंग की चूड़ियों का है शास्त्रीय महत्व : प्राचार्य

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मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है जिसमें शिव पूजन एवं रुद्राभिषेक आदि अनुष्ठान करके श्रद्धालु धन्य हो जाते हैं। इसमें निष्ठा पूर्वक पूजा करने से भगवान शंकर सारी इच्छाओं को पूर्ण कर देते हैं। इस पावन महीने में हर तरफ हरियाली छा जाती है । भगवान शिव प्रकृति के बीच ही रहते हैं। उन्हें जो बिल्वपत्र,दूर्वा,शमीपत्र,भाँग,धतूरा आदि चढाया जाता है वो भी हरे रंग का होता है। इसलिए हरा रंग उनको अत्यधिक प्रिय है। हमारे धर्मग्रंथों में वृक्ष एवं वनस्पतियों आदि की पूजा का विधान है। ऐसा करने से हम प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं। इसलिए हरे रंग के वस्त्र आदि पहनने से प्रकृति का भी आशीर्वाद मिलता है। सावन में महिलाएं विशेष तौर पर साज-सिंगार करती हैं जिसमें महिलाओं के लिए हरे रंग का विशेष महत्व होता है। यह प्रकृति की सौन्दर्य का महीना है।
उक्त जानकारी महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।
उन्होंने बताया कि शास्त्रों में महिलाओं को भी प्रकृति का रूप माना जाता है। इस मौसम में बरसात की बूंदों से प्रकृति खिल उठती है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। सावन प्रारंभ होते ही सुहागिन महिलाओं पर सावन का रंग चढना शुरु हो जाता है। ऐसे में प्रकृति से एकाकार होने के लिए महिलाएँ मेंहदी लगाती हैं तथा हरे रंग के वस्त्र व चूड़ियाँ आदि पहनती हैं। हरा रंग उर्वरा का प्रतीक माना गया है। सावन में प्रकृति में हुए बदलाव का प्रभाव शरीर और मन पर पड़ता है,जो स्त्री-पुरुषों में काम भावना को बढाता है। सावन महीना महिलाओं के लिए बहुत हीं खास होता है। इस मास में ही ऋतु परिवर्तन होता है। इसमें स्त्रियाँ सोलह सिंगार करती है। अपने सिंगार में वे हरे रंग की चूड़ियाँ,हरे रंग के वस्त्र व मेंहदी को अधिक महत्व देती है। सावन के महीने में हरा रंग धारण करने से भगवान शंकर के साथ शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं,क्योंकि इस समय मनुष्य स्वयं को प्रकृति के साथ जोड़ लेता है। इसके अतिरिक्त हरे रंग की चूड़ियाँ पहनने से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं।
प्राचार्य पाण्डेय ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हरा रंग बुध से प्रभावित होता है। बुध एक नपुंसक ग्रह है। इसलिए बुध से प्रभावित होने के कारण हरा रंग काम-भावना को नियंत्रित करने का काम करता है। सावन में मेंहदी लगाने एवं हरे रंग की चूड़ियाँ पहनने का वैज्ञानिक कारण भी यही माना जाता है। इस मास में कई प्रकार की बीमारियां फैलने लगती है। आयुर्वेद में हरा रंग कई रोगों में कारगर माना गया है। इस कारण से भी महिलाएं स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मेंहदी लगाती हैं और हरे रंग के वस्त्र व चूड़ियाँ पहनती है। एक औरत के लिए शादी के बाद लाल रंग सुहाग की निशानी मानी जाती है,वैसे ही हरा रंग भी उसके जीवन में काफी महत्वपूर्ण होता है। सावन में औरतें हरी चूड़ियाँ इसलिए पहनतीं है कि उन्हें शिवजी का आशीर्वाद मिले और उनके पति की लम्बी आयु हो। हरा रंग धारण करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा बुद्धि व समृद्धि प्राप्त होती है।
कहा जाता है सावन में मेंहदी के बिना महिलाओं का सिंगार अधूरा माना जाता है। सावन में मेंहदी लगाना एक परंपरा है,जिसमें यह कहा जाता है कि मेंहदी लगाने से पति-पत्नी का संबंध मजबूत होता है। ऐसी मान्यता है कि मेंहदी का रंग जितना गहरा होता है उतना ही पति-पत्नी में प्यार बढ़ता है। हरा रंग प्रेम,प्रसन्नचित्त और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से महिलाएं सावन के महीने में हरे रंग के वस्त्र,मेंहदी,चूड़ियाँ व आभूषण आदि सिंगार धारण कर भगवान एवं प्रकृति को धन्यवाद देती है और अपनी खुशी का इजहार करती है।
हरा रंग भगवान शिव को प्रिय है,अतः उन्हें प्रसन्न करने के लिए हरी चूड़ियाँ, मेंहदी व हरा वस्त्र पहना जाता है,जिससे महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मिले।