पाक्षिक काव्य गोष्ठी, विक्रमी संवत्सर 2083 के उपलक्ष्य में 30 मार्च को होगा भव्य चैत्र महोत्सव।

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नागरिक विकास मंच के तत्वावधान में आयोजित होगा चैत्र महोत्सव

जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट



जहानाबाद -नगर के साहित्यिक वातावरण में आज कविता के सुरों के साथ नव संवत्सर के स्वागत की मधुर आहट सुनाई दी। नागरिक विकास मंच के तत्वावधान में आयोजित पाक्षिक काव्य गोष्ठी में हिंदू नववर्ष विक्रमी संवत्सर 2083 के प्रथम दिन 19 मार्च (गुरुवार) को विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने यह प्रस्ताव पारित किया कि नव संवत्सर के अवसर पर लोग अपने-अपने घरों में विधिवत पूजन करें तथा अपने द्वार पर भगवा ध्वज फहराकर नव वर्ष का स्वागत करें।



इसके साथ ही आगामी पाक्षिक काव्य गोष्ठी को “जहानाबाद चैत्र महोत्सव” के रूप में भव्यता से आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसकी तैयारियां प्रारंभ करने की बात भी बैठक में कही गई।

कार्यक्रम का आयोजन नागरिक विकास मंच के सचिव संतोष श्रीवास्तव के आवास पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष डा. एस. के. सुनील ने की, जबकि संचालन मंच के सचिव संतोष श्रीवास्तव ने किया।

पाक्षिक काव्य गोष्ठी में कवियों और कलाकारों ने चैत्र मास के स्वागत में गीत और कविताओं की प्रस्तुति देकर वातावरण को भावमय बना दिया। इसी क्रम में एक चैत्र गीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया—



चैत्र की पावन बेला आई, नव जीवन की ज्योति जगाई,
कोयल गाए आम्र-बौर में, खुशियों की मधुर तरंग समाई।
नव संवत्सर का दीप जले, हर आँगन में मंगल छाए,
धरती ओढ़े हरियाली का वस्त्र, नभ भी नव उत्सव मनाए।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध नाटककार एवं गायक विश्वजीत अलबेला, चितरंजन चैनपुरा, जाने-माने कलाकार मुखिया जी, प्रसिद्ध पार्श्व गायक एस. के. मिर्जा, अजय विश्वकर्मा, मगही विकास मंच के सचिव अरविंद कुमार आंजाश, मगध विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी साइंस के प्राध्यापक प्रकाश चंदा, नरेन्द्र कुमार सिन्हा (सुनिल जी) तथा सुनील कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य साहित्यप्रेमियों ने अपने विचार व्यक्त किए और चैत्र माह के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में 1 मार्च से 15 मार्च के बीच दिवंगत हुए व्यक्तियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया।

इस प्रकार काव्य और संस्कृति की मधुर संगति में नव संवत्सर के स्वागत का संकल्प लेते हुए गोष्ठी का समापन हुआ।