
फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य की साक्ष्य-आधारित सेवाओं को प्रोजेक्ट ADHUNA (Advancing Delivery of Healthcare through Upgraded Newborn and Intrapartum Care Approaches) के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है। CPD के पहले चरण की सफलता के बाद, CPD 2.0 की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य एंटिनेटल, इंट्रापार्टम, पोस्टनटल और नियोनेटल देखभाल के पूरे क्रम में प्रीटर्म जन्मों की रोकथाम, प्रबंधन और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।

CPD 2.0 में निरंतर देखभाल (Continuum of Care) दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें अद्यतन क्लिनिकल मार्गदर्शन, प्रायोगिक ड्रिल्स और संचार-केंद्रित मॉड्यूल शामिल हैं। ये सत्र डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा की निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में सीख को तुरंत व्यवहार में उतारा जा सके।
प्रोजेक्ट ADHUNA के अंतर्गत चयनित 29 जिलों में से एक, गया में CPD 2.0 सत्र 13 जून 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. भास्कर पाल (प्रेसिडेंट, FOGSI 2026), तथा डॉ. जयदीप टैंक (प्रोजेक्ट डायरेक्टर, ADHUNA एवं पास्ट प्रेसिडेंट, FOGSI 2024) ने किया। यह सत्र मगध ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से, डॉ. मंजू सिन्हा (President मगध ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी सोसाइटी) तथा डॉ. पूनम सहाय (Secretary मगध ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी सोसाइटी) के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें जिला IAP चैप्टर, ADHUNA मास्टर ट्रेनर्स और चैंपियंस का सहयोग रहा। कार्यक्रम होटल आर्यावर्त, गया में शाम 6:30 बजे से 9:00 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें 55 डॉक्टरों एवं 85 स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया।

इस सत्र में प्रीमैच्योरिटी केयर पाथवे से जुड़े प्रमुख क्लिनिकल विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें शामिल थे:
• एंटिनेटल देखभाल के दौरान प्रीटर्म जन्म की स्क्रीनिंग और जोखिम आकलन, जिसमें गर्भकाल निर्धारण और सर्वाइकल लेंथ स्क्रीनिंग।
• साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप जैसे सर्वाइकल सर्क्लाज, एंटिनेटल कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स, एंटीबायोटिक्स, टोकॉलाइटिक्स, मैग्नीशियम सल्फेट और रेफरल योजना।
• प्रीटर्म डिलीवरी में लेबर प्रबंधन: डिलीवरी का समय व तरीका, फिटल मॉनिटरिंग, डिलीवरी तैयारी और डिलेयड कॉर्ड क्लैम्पिंग।
• पोस्टनटल एवं प्यूरीपरल देखभाल: स्तनपान, मातृ मानसिक स्वास्थ्य और पोस्टनटल संक्रमणों की रोकथाम पर विशेष जोर।

• नियोनेटल केयर पर विशेष सत्र: रिससिटेशन, थर्मल केयर, फीडिंग और रेफरल प्लानिंग की ड्रिल्स; साथ ही कंगारू मदर केयर (KMC) पर संचार सत्र, तत्काल KMC की शुरुआत पर व्याख्यान, तथा मदर–न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) मॉडल और नवजात परिवहन हेतु पोर्टेबल CPAP जैसे नवाचार।
इस चरण के माध्यम से, प्रोजेक्ट ADHUNA FOGSI के व्यापक मिशन के अनुरूप राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर सदस्यों की भूमिका को सुदृढ़ करता है, ताकि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के उच्च-प्रभावी, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप निजी स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर, सम्मानजनक और प्रभावी रूप से लागू हों।
FOGSI के बारे में
फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) भारत में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों का प्रमुख पेशेवर संगठन है। 275 सदस्य सोसायटीज़ और 43,011 से अधिक सदस्यों के साथ, FOGSI देश के सबसे बड़े सदस्यता-आधारित पेशेवर संगठनों में से एक है। FOGSI की स्थापना 6 जनवरी 1950 को मद्रास में हुई।
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
डॉ. मंजू सिन्हा
प्रेसिडेंट, मगध ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी
