लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की दिन पर दिन बदहाल होती जा रही है स्थिति।

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जिला एवं प्रखंड स्तर पर पत्रकारिता करने वाले उपेक्षित -सतोष श्रीवास्तव

जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।

जहानाबाद – लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत पत्रकारों की स्थिति दिन प्रतिदिन अधिक दयनीय होती जा रही है। जिन्हें लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। वहीं स्तंभ आज उपेक्षा , असुरक्षा, आर्थिक दबाव एवं सामाजिक उपेक्षा के बीच स॑घर्ष करने को मजबूर हैं।

राज्य स्तर पर पत्रकारों के संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रभावी लागू होने योग्य व्यवस्था का आभाव साफ दिखाई पड़ रहा है। कागज़ों में नितियां तो बनती है,पर जमीनी हकीकत में पत्रकार अकेला और असुरक्षित खड़ा नजर आता है।
इन सब बातों के लिए जिले के वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव से पत्रकारिता एवं पत्रकारों की स्थिति पर बात चित के क्रम में उन्होंने आज के समय में जो पत्रकारों के साथ बीत रहा है,उस सन्दर्भ में बताया, साथ ही उन्होंने एक शायर के तरह बताया,
कलम की नोक जब डर से झुक जाएं, तो सच की आवाज भी घुटकर रह जाए, ऐसे में लोकतंत्र क्या सांस लेगा, जब चौथा स्तंभ ही टुटकर गिर जाएं
उन्होंने बताया कि न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर भी पत्रकारों से जुड़े मामलों में कई बार अपेक्षित संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का अभाव देखा गया है, जिससे असंतोष एवं भय दोनों बढ़ जाता है।
आज हालात देखने को मिल रहा है कि न तो आम जनता पहले जैसा सम्मान दे रहा है, और न ही प्रशासनिक तंत्र पत्रकारों की भूमिका को गंभीरता से लें रहें हैं, परिणाम स्वरूप पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य और जनहित कमजोर पड़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि,
सच लिखने वाले ही जब असुरक्षित हो , तो समाज के आईने धुंध पड़ जाते हैं, जहां सवाल पुछना अपराध बन जाएं, वहां लोकतंत्र भी सिमट कर रह जाते हैं
कलम अगर खामोश कर दी जाएं डर के नाम पर, तो सच्चाई भी इतिहास में दफन हो जाती है, जहां सवालों को कुचल दिया जाए, वहां व्यवस्था भी खोखली हो जाती है
आज समय की मांग है कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्थिरता के लिए एक सशक्त और बाध्यकारी कानून बनाई जाएं।जो केवल घोषणा न होकर वास्तविक सुरक्षा प्रदान करें। अन्ततः यह स्पष्ट है कि पत्रकारिता एक पेशा नहीं वल्कि लोकतंत्र की आत्मा है ‌,और यदि आत्मा ही असुरक्षित हो जाएं तो पुरा लोकतंत्र कमजोर पड़ जाएगा।