
कही कागज पर ही जांच सिमट कर रह न जाए !
जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।
जहानाबाद – सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के मुल भुत समस्याओं को लेकर मनरेगा योजना प्रारंभ किया गया था। हालांकि अब इस योजना को जी राम जी कर दिया गया है। परंतु जी राम जी योजना लागू होने के पूर्व ही मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार डूबे लोगों ने फर्जी रुप से कागज़ पर ही काम दिखा 36 लाख रुपए से ज्यादा की निकासी कर ली गई।
हालांकि मनरेगा योजना भ्रष्टाचारियों के लिए काफी लाभदायक रहा।
शिक़ायत मिलने के वावजूद भी लिपापोती कर इति श्री कर दिया जाता रहा। चाहे वो मामला जल जिवन हरियाली के तहत् वृक्षारोपण हों,पईन उड़ाही एवं तटबंध मरम्मती के नाम पर पैसा की निकासी जाॅब कार्ड धारी के खाता में पैसा गया, और मनरेगा योजना के तहत् काम कर रहे ठिकेदार द्वारा जाॅब कार्ड धारी से पैसा वसूल लिया जाता रहा।
इसी कड़ी में एक मामला घोषी प्रखंड क्षेत्र के लखावर पंचायत से जहां बिना काम कराएं 36 लाख,96 हजार 752 रुपए की निकासी कर ली गई।जिसका खबर भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित भी किया गया है। लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करने की बात कही जा रही है।
ग्रामीण सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार, मनरेगा योजना में हुई फर्जी निकासी पर, ग्रामीणों ने जांच की मांग किया गया था।
मनरेगा योजना में हुई अनियमितता को लेकर राज्य स्तरीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति पटना के सचिव रविन्द्र कुमार ने अपने पत्रांक 33/26/vc/आर दिनांक 10 जूलाई को लखावर पंचायत में हुई फर्जी निकासी पर कार्रवाई करने का आदेश निर्गत किया था।
परंतु जिला अपर समाहर्ता विभागीय पदाधिकारी विनय कुमार सिंह द्वारा स्थल जांच न कर,फर्जी निकासी करने वाले मनरेगा से सम्बंधित कर्मीयों से स्पष्टीकरण की मांग किया गया है।
यहां सवाल यह उठता है कि मनरेगा योजना में हुई फर्जी निकासी,जिन योजनाओं के नाम पर किया गया है,उस योजनाओं की स्थल जांच क्यों नहीं किया जा रहा है?
आखिर क्यों केवल भ्रष्टाचार में डूबे कर्मीयों से स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है? क्या भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मीयों को स्पष्टीकरण देने पर मामला को लिपापोती कर दिया जाएगा?
क्या कही बरसात से होने वाली वर्षा से पईन तथा आहर में पानी भर जाने का इंतजार किया जा रहा?
यदि सभी सवालों का जवाब नहीं है तो फिर योजनाओं की स्थल जांच के उपरांत फर्जी निकासी का मामला प्रतित होता है तो मनरेगा कर्मी जो भ्रष्टाचार में लिप्त है उसपर कारवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने भी जांच पड़ताल में लिपापोती होने तथा कर्मीयों को बचाने का संदेह उत्पन्न होना बताया है। ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से अनुरोध किया है कि इस मामले में अपने स्तर से संज्ञान में लेते हुए कारवाई करने की मांग किया है।
मामला चाहे जो कुछ भी हो, लेकिन इतना तो तय है कि मनरेगा योजना भ्रष्टाचारियों का भेट चढ़ गया है। योजनाओं को सही जांच किया जाएं तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगा।
