
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
बिहार के में शराबबंदी के सख्त कानून के बावजूद अवैध शराब का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। मोतिहारी जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह ‘मौत का माल’ पिपराकोठी इलाके से शुरू होकर गांव की गलियों तक पहुंचा। पुलिस ने मुख्य आरोपी तस्करों को गिरफ्तार किया है, लेकिन सवाल वही है, शराबबंदी के दौर में यह जहर कैसे घर-घर पहुंच गया?
– जहरीली स्प्रिट की शुरुआत पिपराकोठी से
पुलिस जांच के अनुसार, इस खूनी सिलसिले की जड़ पिपराकोठी थाना क्षेत्र में है। यहां के दो बड़े स्प्रिट तस्कर कन्हैया और राजा ने मेथनॉल जैसे जहरीले केमिकल वाली स्प्रिट की भारी खेप मंगवाई थी। मेथनॉल एक खतरनाक रसायन है, जो औद्योगिक उपयोग के लिए होता है, लेकिन अवैध शराब बनाने वालों द्वारा इसे सस्ते में मिलाकर शराब तैयार की जाती है। यह मिश्रण पीने से लीवर फेल, अंधापन और मौत तक हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक, कन्हैया और राजा ने इस स्प्रिट को कम दामों में खरीदा और आगे बेचने की तैयारी की। पिपराकोठी से निकलते ही यह ‘डेथ कॉकटेल’ बाजार में उतर गया।

पुलिस ने बताया कि कन्हैया और राजा ने सबसे पहले खलीफा और सुनील शाह को यह खेप सौंपी। ये दोनों मझोले स्तर के तस्कर हैं, जो बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। खलीफा और सुनील ने बिना देरी किए इसे मुख्य तस्कर नागा राय और जम्मू बैठा तक पहुंचा दिया। नागा राय ने परसौना इलाके की जिम्मेदारी संभाली, जबकि जम्मू बैठा ने बालगंगा क्षेत्र में वितरण का ठेका लिया। इस चेन के जरिए जहरीली स्प्रिट सीधे गांवों के चाय दुकानों, ठेकों और घरों तक पहुंच गई। ग्रामीणों को सस्ती ‘देशी शराब’ के नाम पर यह जहर परोसा गया, जिसका नतीजा भयानक रहा।
सप्लाई चेन का खुलासा: हाथों-हाथ बंटा ‘मौत का सामान’
मोतिहारी पुलिस की विशेष टीम ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। प्रारंभिक बिंदु पिपराकोठी से शुरू होकर यह चेन खलीफा-सुनील शाह, नागा राय और जम्मू बैठा तक फैली। नागा राय ने परसौना के आसपास के गांवों में वितरण शुरू किया। वहां छोटे-छोटे रिटेलरों को थोक में स्प्रिट दी गई, जो इसे पानी, चीनी और अन्य मिश्रणों के साथ मिलाकर शराब बना रहे थे। इसी तरह जम्मू बैठा ने बालगंगा क्षेत्र में ‘घर-घर डिलीवरी’ का काम संभाला। रात के अंधेरे में स्कूटरों और साइकिलों पर बोतलें बांटी जातीं, ताकि कोई शक न हो।
एक युवक ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि
गांव में चाय की दुकानों पर 50-60 रुपये लीटर मिल जाती थी। मजदूर भाई लोग थकान मिटाने के लिए पी लेते थे। कल रात ही मेरे पड़ोसी ने पीया, सुबह तक हालत बिगड़ गई।” इसी तरह कई परिवार टूट चुके हैं। मौतों की संख्या बढ़ रही है, क्योंकि मेथनॉल का असर देर से होता है। डॉक्टरों के अनुसार, जहरीली शराब से पेट में जलन, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ और कोमा जैसी स्थिति बनती है। मोतिहारी सदर अस्पताल में 20 से अधिक मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 5 आइसीयू में हैं।
प्रशासन की कमजोर कड़ी: चौकीदार ही था सुरक्षा कवच
इस पूरे नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है प्रशासन के अंदर का भ्रष्टाचार। परसौना चौकी का चौकीदार भरत राय इस कारोबार का मुख्य संरक्षक था। जांच में पता चला कि भरत राय और मुख्य आरोपी नागा राय रिश्तेदार हैं। भरत राय की मिलीभगत से तस्कर बेधड़क घूमते थे। वह रूट की जानकारी देता था, पुलिस चेकिंग से पहले अलर्ट करता था और बदले में कमीशन लेता था। गांववालों का आरोप है कि चौकीदार की नजरों के आगे कोई ठेकेदार नहीं पकड़ा जाता था। पुलिस ने भरत राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसपी SP स्वर्ण प्रभात ने कहा, “चौकीदार की गिरफ्तारी से नेटवर्क टूटेगा। आगे भी सख्त कार्रवाई होगी।”
पुलिस ने अब तक कन्हैया, राजा, खलीफा, सुनील शाह, नागा राय, जम्मू बैठा और भरत राय समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 200 लीटर स्प्रिट, 500 लीटर अवैध शराब और वाहन जब्त किए गए। एसएसबी और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से छापेमारी कर रही है। लेकिन सवाल उठता है कि शराबबंदी लागू होने के 10 साल बाद भी यह कारोबार कैसे फल-फूल रहा है?
मृतकों के परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं। एक विधवा ने रोते हुए कहा, “पति कमाने वाला था, अब बच्चे भूखे रहेंगे। दोषियों को फांसी दो।” जिला प्रशासन ने मृतकों को 4 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया है। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क ध्वस्त हो चुका, लेकिन ग्रामीणों को भरोसा नहीं। वे कहते हैं, “जब तक अमला साफ न हो, यह सिलसिला रुकेगा नहीं।
प्रभावित क्षेत्रों में घर घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा सर्वे किया जा रहा है और लोगों की जांच के साथ साथ इलाज भी किया जा रहा है
