नागरिक विकास मंच एवं संस्कार भारती जिला शाखा के तत्वावधान में भव्य चैता का आयोजन।

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चैता गायक कलाकारों को अंग वस्त्र देकर किया गया सम्मानित।

जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।

जहानाबाद -चैत्र मास की मधुर बेला में जिले का साहित्यिक वातावरण लोकधुनों और काव्य-रस से सराबोर हो उठा। नागरिक विकास मंच एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाक्षिक काव्य गोष्ठी सह भव्य चैत्र महोत्सव ने पूरे शहर को लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम में चैत्र गीतों का रोचक मुकाबला हुआ, जिसमें कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिक्षाविद डा. एस. के. सुनील ने की, जबकि संचालन नागरिक विकास मंच के सचिव संतोष श्रीवास्तव ने अपने आवासीय परिसर में किया गया।


कार्यक्रम में जहानाबाद के प्रसिद्ध चैत्रा गायक अशोक जी (काको) एवं युवा कलाकार रहिश यादव ने अपनी-अपनी टीम के साथ शानदार प्रस्तुति दी। दोनों टीमों के बीच हुए गायन मुकाबले ने पूरे माहौल को लोक-संगीतमय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गूंज से कलाकारों का भरपूर उत्साहवर्धन किया।
लोकधुनों की लहर-,
पवन में घुली है मधुरिम तान,
हर दिल में बसा है चैत्र गान।
गांव-गांव से उठी ये पुकार,
संस्कृति हमारी सबसे सुंदर उपहार।
इस अवसर पर जिले के अनेक गणमान्य लोग एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से शिक्षाविद चन्द्रभूषण शर्मा (भोला बाबू), कोषाध्यक्ष रामजीवन पासवान, पूर्व मुखिया सुभाष शर्मा, प्रोफेसर एवं साहित्यकार डा. रविशंकर शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र प्रसाद सुधाकर, प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार, नाटककार एवं गायक विश्वजीत अलबेला, युवा गायक अवनीश कुमार मुन्ना, पार्श्व गायक एस. के. मिर्जा, अजय विश्वकर्मा, अरविंद कुमार आंजाश, प्रकाश चंदा, नरेन्द्र कुमार सिन्हा (सुनील जी) तथा सुनील कुमार श्रीवास्तव सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के दौरान जिले के प्रसिद्ध मगही गायक चितरंजन चैनपुरा के पौत्र रत्न के आगमन पर पारंपरिक “शौहर” गीत का भी गायन किया गया, जिसने माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया।
वक्ताओं ने चैत्र माह के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपरा को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।
भावों की अंतिम लहर-
गीतों में बसती यादें सारी,
रिश्तों की ये डोरी प्यारी।
संस्कृति का दीप यूँ ही जलता रहे,
हर चैत्र यूँ ही मन खिलता रहे।
कार्यक्रम के अंत में 15 मार्च से 31 मार्च के बीच दिवंगत हुए व्यक्तियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। धन्यवाद ज्ञापन युवा कवि गौतम परासर ने किया।

यह चैत्र महोत्सव न केवल लोकगीतों की मधुरता को जीवंत करने वाला रहा, बल्कि जहानाबाद की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा और दिशा देने में भी पूर्णतः सफल रहा।