चंपारण:: प्रो. प्रसून दत्त सिंह को मिला डिज़ाइन पेटेंट : संस्कृत शोध के डिजिटलीकरण में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि

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मोतिहारी।

महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो॰ प्रसून दत्त सिंह एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो॰ अनिल प्रताप गिरि को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा ‘डिजिटल संस्कृत पाठ अनुसंधान हेतु आँकड़ा संसाधन उपकरण’ के लिए डिज़ाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि संस्कृत शोध, भारतीय ज्ञान परम्परा तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं अभिनव पहल मानी जा रही है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो॰ संजय श्रीवास्तव ने दोनों विद्वानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता एवं शैक्षिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करती है, अपितु ‘विकसित भारत’ के संकल्प में भारतीय भाषाओं एवं प्राचीन ज्ञान परम्परा की सक्रिय भूमिका को भी सशक्त रूप से रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि प्रो॰ प्रसून दत्त सिंह एवं प्रो॰ अनिल प्रताप गिरि द्वारा विकसित यह अभिनव उपकरण संस्कृत पाण्डुलिपियों, ग्रंथों एवं डिजिटल पाठों के विश्लेषण को अत्यंत सरल, तीव्र एवं प्रभावी बनाएगा, जिससे देश-विदेश के शोधार्थियों एवं विद्वानों को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

यह उपकरण संस्कृत के डिजिटल ग्रंथों में निहित विशिष्ट भाषायी प्रतिरूपों, व्याकरणिक संरचनाओं तथा संदर्भगत तत्वों की अत्यल्प समय में खोज एवं विश्लेषण करने में सक्षम है। संस्कृत अध्ययन एवं पाण्डुलिपि अनुसंधान के क्षेत्र में यह तकनीक शोध की नवीन संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा भारतीय ज्ञान परम्परा को आधुनिक तकनीकी आधार प्रदान करेगी।

संस्कृत साहित्य, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं शैक्षिक नेतृत्व के क्षेत्र में प्रो॰ प्रसून दत्त सिंह का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय एवं बहुआयामी रहा है। वे महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत विभागाध्यक्ष, परिसर निदेशक, मुख्य अनुशासक तथा पूर्व अधिष्ठाता के रूप में दीर्घकाल से शैक्षिक, प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का सफल नेतृत्व कर रहे हैं। भारतीय दर्शन, वैदिक साहित्य, संस्कृत काव्यशास्त्र एवं पाण्डुलिपि विज्ञान उनके प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र हैं। उनके निर्देशन में अनेक शोधार्थियों ने विद्यावारिधि उपाधि प्राप्त की है तथा उनके द्वारा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानमालाओं एवं शैक्षणिक आयोजनों का सफल संयोजन किया गया है। प्रो॰ सिंह की अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें एवं शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं तथा वे शोध पत्रिकाओं के संपादन से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा, राष्ट्रचिन्तन, संस्कृति एवं मानव कल्याण विषयक उनके अकादमिक योगदानों के लिए उन्हें ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ तथा ‘सर्वपल्ली राधाकृष्णन सम्मान’ जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।

विश्वविद्यालय परिवार ने इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रो॰ प्रसून दत्त सिंह एवं प्रो॰ अनिल प्रताप गिरि को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारतीय भाषाओं एवं संस्कृत अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी।