
रंजन कुमार ब्यूरो चीफ शेखपुरा
शेखपुरा पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कार्यक्रम का आयोजन भव्य रूप से किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि इंजीनियर सचिन सौरभ सम्मिलित हुए। सौरभ ने अपने संबोधन में बच्चों को भारत के महान वैज्ञानिकों डॉ. विक्रम साराभाई और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदानों से अवगत कराया और उन्हें प्रेरित किया कि वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़कर देश का नाम विश्व पटल पर रोशन करें। उन्होंने माननीय सांसद अरुण भारती की ओर से विद्यालय परिवार एवं सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
उन्होंने इसरो की ऐतिहासिक उपलब्धियों मंगलयान और चंद्रयान मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज अंतरिक्ष जगत में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। साथ ही, उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख कर विद्यार्थियों को देश निर्माण हेतु आगे आने का आह्वान किया। इंजीनियर सौरभ ने 2023 में चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व सफलता को याद करते हुए कहा कि “भारत ने दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचकर वह कर दिखाया जो अब तक कोई राष्ट्र नहीं कर सका था। इस सफलता ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध किया और प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे मानवता की साझा धरोहर बताया।” उन्होंने कहा कि आज भारत न केवल नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों बल्कि अमेरिका, फ्रांस, सिंगापुर जैसे विकसित राष्ट्रों के लिए भी सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है, जो भारत की मजबूती और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि अब गगनयान मिशन की बारी है, जिसमें भारत के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में तिरंगा लहराएँगे और वह क्षण हर भारतीय के लिए गौरवशाली होगा। अपने संबोधन में सौरभ जी ने बच्चों को डॉ. कलाम के प्रेरक वाक्य ड्रीम, ड्रीम, ड्रीम; ड्रीम्स ट्रांसफार्मर ईंटो थॉट्स एंड थॉट्स रिजल्ट ईंटो एक्शन को याद दिलाते हुए कहा कि सपनों को साकार करने के लिए कठोर परिश्रम और संकल्प जरूरी है।
किताबों की ओर लौटो
सौरभ ने विशेष रूप से आज के युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अत्यधिक तकनीकी उपयोग टेक्नोलॉजी उसे के कारण बच्चों की बुक रीडिंग एबिलिटी कम होती जा रही है और मानसिक क्षमता पर अवरोध उत्पन्न हो रहा है। यह आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि वे पुनः किताबों की ओर लौटें, क्योंकि किताबें ही सृजनात्मक सोच और गहन ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत हैं। अंत में उन्होंने विद्यालय प्रशासन को सफल आयोजन हेतु धन्यवाद दिया और विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत आज नाविक (NavIC) प्रणाली के माध्यम से अपना स्वदेशी जीपीएस नेविगेशन सिस्टम विकसित कर चुका है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम है।