चमोथा गांव में आठ महीने से ट्रांसफार्मर खराब,तेल और मिस्त्री पर ग्रामीण कर रहे हजारों रुपए खर्च

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रजौली

प्रखंड क्षेत्र के चामोथा गांव में प्राथमिक विद्यालय उर्दू के समीप का बिजली ट्रांसफार्मर बीते आठ माह से खराब पड़ा हुआ है,जिसको लेकर विभाग को भी सूचना दिया गया है।ग्रामीणों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भी बिजली विभाग द्वारा खराब पड़े ट्रांसफार्मर को ना तो बदला गया है और ना ही उसकी मरम्मती करवाई गई है।ग्रामीण मो. जमशेद आलम,शहीद इकबाल,मो. राजा,मो. अताउर रहमान,जावेद अख्तर,मो. सफिक मोदी,रामविलास राम,लेखन राजवंशी,संजय राजवंशी समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि उनके गांव का ट्रांसफार्मर बीते 8 माह से खराब है।गांव में लगभग 150 घरों में अधिकांश लोगों के घर में चापाकल नहीं है,पानी के लिए लोग मोटर और टंकी पर ही निर्भर रहते हैं।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रत्येक उपभोक्ता प्रत्येक माह औसतन 600-700 रुपए बिजली बिल भी जमा करते हैं,उसके बावजूद लोगों की परेशानी को बिजली विभाग द्वारा नजरंदाज किया जा रहा है।ग्रामीणों ने कहा कि गांव में स्थित दूसरे ट्रांसफार्मर से हमलोगों को लाइन सप्लाई किया गया था,किंतु अत्यधिक वोल्टेज खपत के कारण तीन में से दो ही फेज में लाइन सप्लाई किया जा रहा है।इसको लेकर तीन दिनों पूर्व बिजली विभाग के जेई को लिखित आवेदन दिया गया है,किंतु विभाग द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।बिजली ट्रांसफार्मर के खराब रहने से उर्दू स्कूल समेत घरों में बिजली सप्लाई बंद पड़ा हुआ है।ग्रामीण अंधेरे और जल संकट से जूझ रहे हैं।गांव के बच्चों को पढ़ाई लिखाई करने में भी काफी परेशानी हो रही है।ग्रामीणों ने कहा कि गांव में दिनेश और बब्लू नामक दो मिस्त्री के कहने पर ट्रांसफार्मर के तेल के लिए 4000 रुपए और ट्रांसफार्मर बनाने आए मिस्त्री के लिए 3000 रुपए आपस में चंदा करके दिया गया है।ग्रामीणों ने कहा कि बिजली विभाग द्वारा हमलोगों से बिजली बिल लिया जाता है,किंतु खराबी होने पर सुधार नहीं किया जाता है।वहीं खराब पड़े ट्रांसफार्मर के समीप बिजली के तार झूलते दिखाई दिए।बिजली विभाग के इस प्रकार के रवैए से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।