
रामपुर मनिहारन
प्राचीन मंदिर श्री ठाकुरद्वारा में अखिल भारतीय सोहम महामंडल शाखा के तत्त्वावधान में चल रहे सप्तदिवसीय संत सम्मेलन के चतुर्थ दिवस सोहं पीठाधीश्वर श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने कहा कि जीवन में मनुष्यत्व अर्थात् मानवता दुर्लभ है। हमको भगवान की कृपा से मानव जीवन तो मिल गया है। किन्तु हम प्रमादवश भूल जाते हैं।शनिवार को अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने कहा कि जीवन में धर्म के अनुसार श्रेष्ठ कर्म करके दया, प्रेम, परोपकार, करुणादि श्रेष्ठ गुण आजाएं तो समझना चाहिए कि हम परमार्थ के मार्ग पर बढ़ रहे हैं।यदि हमारे पास सद्विद्या, तप, दान, ज्ञान, सदाचार, धर्म आदि गुण नहीं है तो समझना चाहिए जीवन व्यर्थ ही है। खाना, पीना सोना जागना आदि तो पशु पक्षी भी कर लेते हैं। इसलिए हमको प्रयत्नपूर्वक अच्छे गुणों धारण करना चाहिए जिससे हमारे जीवन में मानवता आ सके।

प्रीतमदास ने कहा कि मन की निर्मल बनाने के लिए हमको प्रयास करना चाहिए। क्योंकि निर्मल मन वाले से ही भगवान प्रसन्न होते हैं।स्वामी प्रणवानंद ने हनुमान के सद्गुणों का वर्णन किया।उन्होंने हनुमान द्वारा सीता की खोज की कथा सुनाई। स्वामी नारायणानंद ने जगत को क्षणभंगुर बताया। स्वामी अनंतानंद ने भगवान की शरण ग्रहण करने की प्रेरणा दी, स्वामी कृपालु ज़ी और स्वामी गोपालानन्द ने भी श्रोताओं को उपदेशित किया।
। इस अवसर पर श्री काशीराम सैनी, जयराज पंवार, कुलदीप सैनी, सुरेन्द्र सैनी, संजय पंवार, बाबूराम रुहेला अनुज सैनी, नीरज सैनी, इत्यादि भक्तों ने भगवान की आरती कराई।
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
