शकूराबाद के ग्राम गुलाबगंज में बीते माह में विवादित जमीन को कब्जा किए जाने में हुआ बड़ा खुलासा

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जमीन मालिक हेमंत श्रीवास्तव अपनी जमीन हासिल करने को लेकर खा रहे हैं दर-दर की ठोकर,

एक सौ छप्पन एकड़ के मालिक होने के बावजूद रहने को घर भी नही।

जमीन किसी और की, कब्जा कर लिया कोई और, एवं जेल की सलाखों में कैद हुआ कोई और

शकूराबाद थाना के खेल में कई परिवार हुए बर्बाद

जहानाबाद

“मिट्टी की भी एक याद होती है,
वह अपने असली कदमों को पहचानती है।
कागज़ों से भले इतिहास बदल जाए,
पर धरती अपने वारिसों को नहीं भूलती है।”

जहानाबाद -रतनी से धीरेन्द्र कुमार की रिपोर्ट।

जहानाबाद -रतनी -शकूराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गुलाबगंज में बीते माह विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद अब एक नए और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गया है। जिस जमीन को लेकर गांव में विरोध, तनाव और पुलिस-ग्रामीण टकराव हुआ था, अब उसी जमीन के स्वामित्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जाता है कि विवादित भूमि पर कब्जा कराए जाने के दौरान ग्रामीणों ने इसका जोरदार विरोध किया था। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस पर हमला करने के आरोप में दर्जनों लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया खुलासा सामने आया है। ग्राम सिकंदरपुर निवासी हेमंत श्रीवास्तव, पिता राजामोहन प्रसाद उर्फ मनन बाबू, ने दावा किया है कि गुलाबगंज की विवादित जमीन उनके पूर्वजों की रैयती संपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया।

हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पूर्वज किसी कारणवश गांव छोड़कर अन्यत्र जाकर बस गए थे। समय बीतने के साथ उनकी पुश्तैनी जमीनों पर धीरे-धीरे लोगों ने कब्जा जमा लिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्वज लाला संत प्रसाद के नाम से विभिन्न मौजों में लगभग 156 एकड़ जमीन दर्ज है, जिस पर वर्षों से अवैध कब्जा किया गया है।

“विरासत की थाती जब बिखरने लगती है,
तो रिश्तों से पहले ज़मीनें बंटती हैं।
और अदालत की चौखट पर खड़ा इंसान,
अपनी ही मिट्टी का पता पूछता है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि गुलाबगंज की जमीन पर कब्जा करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय में भ्रामक एवं अवैध दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह किया गया।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कब्जा दिलाने में सहयोग करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

   ज्ञात हो   कि   हेमंत श्रीवास्तव घनबाद में एक  हिन्दी दैनिक अखबार निकालते है। उन्होने  ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल गुलाबगंज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य शकूराबाद बाजार ,पंडौल तथा  सिकन्दर  जमीनों को लेकर भी जल्द कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जमीन वास्तव में किसी और की थी, तो कब्जा किस आधार पर कराया गया? यदि कब्जा अवैध था, तो जेल की सलाखों के पीछे ग्रामीण क्यों पहुंचे?

“सवाल अब सिर्फ खेतों का नहीं रहा,
यह न्याय और व्यवस्था की कसौटी बन गया है।
जहां गांव की खामोशी भी चीख रही है,
और मिट्टी अपने असली मालिक को खोज रही है।”

फिलहाल गुलाबगंज का यह जमीन विवाद इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की निगाह अब प्रशासनिक कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और आने वाले दिनों में होने वाले नए खुलासों पर टिकी हुई है।