चंपारण की खबर::अच्छे लाल के मौत की गुत्थी अनसुलझी

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मृत्यु के लिए जिम्मेदार कौन, शराब, बीमारी या व्यवस्था !

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों को तलाश नहीं पाए चिकित्सकों की टीम, वेसरा प्रीजर्व

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

65 वर्षीय रामकली के 3 पुत्रों में से एक को काल ने पहले ही निगल लिया था, अब दूसरे पुत्र को व्यवस्था निगल गयी है। रामकली का ही पुत्र था अच्छेलाल। अभी 35 वर्ष की उम्र का ही तो था। 5 अप्रैल को पुलिस ने गिरफ्तार किया और 9 अप्रैल को उसकी मौत हो गयी। पूर्वी चंपारण में अच्छेलाल की मौत अबूझ पहेली बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम भी मौत का कारण नहीं ढूंढ पाई है। वेसरा प्रीजर्व किया गया है।
इस पेंचीदगी में पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद धुमिल होती जा रही है।
बता दें कि 5 अप्रैल को शराब के धंधे के आरोप में 35 वर्षीय अच्छे लाल पासवान को उसके घर से हरसिद्धि पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हरसिद्धि पीएचसी में चिकितसकिए जांच के बाद मोतिहारी सेंट्रल जेल भेज दिया गया। परंतु जेल प्रशासन ने उसे अस्वस्थ पाते हुए उसी दिन चिकित्सा के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल भेज दिया। तीन दिनों तक अचछे लाल नशामुक्ति वार्ड में रहा। जहां चिकित्सा की जा रही थी। परंतु 9 अप्रैल को अच्छे लाल की मौत हो गई। तब कई सवाल खड़े हो गए।
जब हरसिद्धि में हुई प्रारंभिक चिकित्सा जांच
पुलिस द्वारा कराई गई चिकित्सा जांच में फिट नहीं पाया तो न्यायालय ने उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजने के बजाय जेल भेजने की चूक कैसे हो गई।
दूसरा सवाल यह उठता है कि जिसे अस्पताल प्रशासन ने बीमार पाया और इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा, तो डाक्टर ने प्रारंभिक जांच में बीमार क्यों नहीं माना।
ऐसे में जब अच्छे लाल को जेल गेट से इलाज के लिए भेजने की जरूरत महसूस हुई थी तो वैसे मैं हरसिद्धि थाना की इंसानियत कहां सो रही थी।
सवाल तो यह भी उठता है कि सदर अस्पताल में अच्छे लाल की मौत कैसे हो गई, जब वहां इलाज चल रहा था।
अगर वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हीं था तो क्या सदर अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की टीम बीमारी तक नहीं पहुंच नहीं पाई।
अगर अच्छे लाल गंभीर रोग से पीड़ित था तो उसे हायर चिकित्सा सेंटर क्यों नहीं भेजा गया।
अच्छे लाल की मौत के कारणों की तलाश के लिए तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने अंत्यपरीक्षण किया। परंतु टीम मौत के कारणों के लिए किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। तब अच्छे लाल के अंगों को दो भागों में प्रीजर्व कर लिए गए। एक में नेचुरल साल्ट का घोल है तो दसरे जार में फार्मोलीन है। चिकित्सा सूत्र के अनुसार
नेचुरल साल्ट में अंगों के अधिकतम एक सप्ताह तक एवं फार्मोलीन में अधिकतम दो सप्ताह तक अंगों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था होती है। वह भी कोल्ड चेन को मेंटेन करने पर सुरक्षित रखा जा सकता है। इस अवधि के बाद अंगो का क्षरण शुरू हो जाता है।
यानी पंद्रह दिन के बाद बेसरा की जांच की जाती है तो मौत के कारणों का स्पष्ट हो पाना संदिग्ध हो जाता है।
लोगों का कहना है कि पूर्वी चंपारण जिले के विभिन्न थानों में अवस्थित वृक्षों में महीनों तक प्रीजर्व किए गए वेसरा टंगे रहते हैं। वैसे में वेसरा के संरक्षण का तकनीकी और व्यवहारिक रूप से अवहेलना हो जाती है।
जब अच्छे लाल की मौत के कारणों के संदेह की सुई व्यवस्था के इर्द गिर्द घूम रही हो तो वैसे में हरसिद्धि पुलिस अच्छे लाल के वेसरा का ससमय जांच करा पाएगी। वह भी ऐसी स्थिति में अच्छे लाल की पत्नी माला देवी, मां रामकली दवी ने मोत का जिम्मेदार हरसिद्धि पुलिस को ठहराई है।