मकर संक्रांति के अवसर पर आर्य समाज द्वारा किया गया दही चुड़ा का आयोजन।

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कार्यक्रम आयोजन के पूर्व वैदिक यज्ञ एवं देव पूजा के साथ किया गया प्रारंभ।

जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।

जहानाबाद -मकर स॑क्राती के आगमन पर आज रविवार को आर्य समाज ने प्रारंभ प्रातः काल वैदिक यज्ञ से आचार्य प्रकाश चंद्र आर्य के आचार्यत्व में किया गया जिसमें सभी आर्य सज्जनों ने यज्ञ में अपनी पुण्य आहुतियां प्रदान किया ।तत्पश्चात चूड़ा दही सहभोज का आयोजन किया गया।

आचार्य प्रकाश चंद्र आर्य जी ने यज्ञ के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि यज्ञ के तीन मुख्य स्तंभ हैं जिसमें देव पूजा, संगति करण और दान है जिसमें देव पूजा में चेतन देव जैसे माता पिता गुरू और जरूरतमंद की सेवा और जड़ तत्व जैसे अग्नि, वायु, सूर्य, पृथ्वी आदि जो ये देव हमें देते तो है लेकिन बदले में हमसे कुछ लेते नहीं इसलिए इस प्रकृति को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। संगति करण में सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना के साथ सभी लोग मिल कर कार्य करे जिससे उत्तम चरित्रवान परिवारों और समाज का निर्माण हो जिससे समाज से दुराचार, नशा और अन्य बुराइयां का अंत संभव है इसके लिए लोग तीन प्रकार के दान – समय दान, श्रमदान और अर्थ दान करें । जिसमें दलित बस्ती में बच्चों को शिक्षित करना, लोगों को ढोंग पाखंड आडंबर के प्रति जागरूक करना है और लोगों को मानसिक और भौतिक स्वच्छ बनाना इसके लिए लोग स्वामी दयानंद जी बताएं मार्ग पर चले और सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन करें ।


वहीं बलराम शास्त्री ने परमात्मा के गुणों की व्याख्या करते हुए बताया कि परमात्मा संपूर्ण जगत को सुख प्रदान करता है और लोगों को दुर्गुण और दुर्व्यसन से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं । अनिल आर्य ने बताया कि आर्य समाज परमात्मा के द्वारा बनाई गई सच्ची मूर्ति जो मनुष्य और अन्य प्राणी की पूजा करता है अर्थात जीवित प्राणियों की सेवा ही सच्ची पूजा है। आयुष चिकित्सक डॉ संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि यज्ञ हवन में डाली गई जो औषधि अग्नि में जलने के उसके औषधीय गुण बढ़ जाते हैं वो स्वास के माध्यम से उसका लाभ शरीर को प्रदान होता है जिससे शरीर रोगमुक्त और पुष्ट हो जाता हैं तथा वातावरण शुद्ध होता है।
डीएवी स्कूल के शिक्षक ललित शंकर जी ने कहा कि स्वामी दयानंद जी के अनुसार जो चीजें विज्ञान और तर्क के अनुसार सही है उसे ग्रहण करना और जो गलत है उसे छोड़ देना चाहिए।



वहीं मकर संक्रांति के विषय में वक्ताओं ने कहा कि यह पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने और मौसम परिवर्तन के कारण है सूर्य 22 दिसम्बर से उत्तरायण होना प्रारम्भ हो जाता है।14 जनवरी से मकर राशि में प्रवेश करने से दिन बड़ा होने का आभास होने लगता है। दिन का बड़ा होना उत्तरायण और रात का बड़ा होना सूर्य का दक्षिणायन होना होता है। उत्तरायण में सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणायन में सूर्य दक्षिण गोलार्द्ध में होता है।
साथ ही यह कृषि आधारित पर्व भी है जो पूरे भारतवर्ष और नेपाल में मनाया जाता हैं । भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां के पर्व त्योहार का संबंध काफी कुछ कृषि पर निर्भर करता है। हवन के माध्यम से लोगों को सनातन संस्कृति और आर्य समाज के सिद्धांतों से जुड़ने का संदेश दिया गया।
यज्ञ की समाप्ति शांति पाठ एवं वैदिक ध्वनि ओम् के उच्चारण के साथ किया गया । तत्पश्चात आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दही ,चूड़ा, तिलकुट, भूरा ,सब्जी सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन के साथ सहभोज का आनंद सबों ने लिया । इस के कार्यक्रम के मुख्य आयोजक आर्य समाज जहानाबाद के प्रधान अजय आर्य, मंत्री विनोद कुमार चंचल, आचार्य प्रकाश चंद्र आर्य, उप कोषाध्यक्ष आशा देवी संजय आर्य, अनिल आर्य, महेंद्र प्रसाद, योग शिक्षक राकेश जी, डॉ संतोष कुमार, रणजीत कुमार, आशुतोष जी, बलराम आर्य, श्रीमति पूनम जी, श्रीमति सरिता जी, आशीष आर्य आदि आर्य सज्जनगण रहे तथा सैकड़ों लोगों लोगों ने यज्ञ कर सहभोज का आनंद लिया।