झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन के निधन पर सीमांचल से उठी श्रद्धांजलि की लहर, सांसद प्रदीप सिंह बोले— “उन्होंने संघर्ष को नेतृत्व, और नेतृत्व को जनक्रांति में बदला”

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अररिया।

जिस आवाज़ में पहाड़ों की गूंज थी, जिस चेहरे पर आदिवासी अस्मिता की चमक थी, जिस कदमों में सामाजिक न्याय की दस्तक थी—वो शख्सियत आज खामोश हो गई। झारखंड आंदोलन के शिल्पकार, हज़ारों आदिवासी परिवारों के सपनों के संरक्षक और संघर्ष की पर्याय पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ‘गुरुजी’ का निधन केवल एक राजनेता की विदाई नहीं, बल्कि झारखंड की चेतना, उसकी आत्मा और उसके स्वाभिमान के एक युग का अंत है।

सीमांचल के इकलौते भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने इस हृदयविदारक क्षण पर गहरा शोक प्रकट किया और कहा कि “गुरुजी ज़मीन के नेता थे। वे सत्ता के लिए नहीं, समाज के लिए जिए। उन्होंने आदिवासी समाज को हाशिए से उठाकर इतिहास के केंद्र में खड़ा कर दिया। आज उनका जाना एक विचार की चुप्पी है, लेकिन उनकी गूंज हमेशा ज़िंदा रहेगी।”

सांसद ने गुरुजी की बहुआयामी भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि “वो संसद में पहुंचे, लेकिन जंगल की गंध नहीं छोड़ी। उन्होंने राजनीति को आदिवासी जीवन के दर्द से जोड़ा और सैकड़ों गांवों को पहचान दिलाई।”

गुरुजी का जीवन सिर्फ आदिवासी चेतना का नहीं, बल्कि उस भारत का प्रतिनिधित्व करता है जो अब भी न्याय, जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ रहा है। उनका व्यक्तित्व नेताओं की भीड़ में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक विरासत की तरह अलग चमकता रहा।

झारखंड क्या, पूरा भारत उन्हें याद करेगा उस समय जब कोई किसान न्याय मांगेगा, कोई युवा हक़ की बात करेगा, या कोई आदिवासी अपने वजूद की तलाश करेगा।

गुरुजी अमर रहें।
आपका जाना शून्य नहीं, एक नई शुरुआत है।
झारखंड की मिट्टी, सीमांचल की हवा और जन-चेतना आपके ऋणी रहेंगे।
विनम्र जोहार।सादर नमन। सच्ची श्रद्धांजलि।