चंपारण की खबर::राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित एवं सुलभ न्याय का प्रतीक : जिला जज

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मोतिहारी / दिनेश कुमार।

राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित एवं सुलभ न्याय का प्रतीक है। आपसी सौहार्द से निपटाए गए मामले दूरगामी प्रभाव डालते हैं। इससे समाज में अमन चैन के साथ साथ भाईचारा व सदभाव बना रहता है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का गठन हुआ है। उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष देवराज त्रिपाठी ने कही। उन्होंने बैंक अधिकारीयों व न्यायिक पदाधिकारियों से कहे कि वे वादों के निष्पादन में उदारता बरतें। वहीं उप समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत की अवधारणा हमारी भारतीयों प्राचीन परंपरा, संस्कृति एवं व्यस्था से जुड़ी है। न्यायमूर्ति पी एन भगवती ने राष्ट्रीय लोक अदालत की रूपरेखा दी है, जिसमें न्याय खर्च नहीं है, लंबी कानूनी प्रक्रिया से निजात मिलती है, न्यायालय से मुकदमों का बोझ कम होता है तथा आपसी संबंध मधुर हो जाता है। जो आज के परिवेश में सफलीभूत हो रहा है। वहीं जिला विधिज्ञ संघ के महासचिव राजीव कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू दूबे ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में किसी पक्ष की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष की विजय होती है। वादों के निष्पादन व छोटे छोटे धाराओं में उदारतापूर्ण कार्य हो तो अधिक से अधिक वादों का निष्पादन किया जा सकता है। न्याय की रोशनी हर घर तक पहुंचे इसी उद्देश्य को राष्ट्रीय लोक अदालत आगे बढ़ा रही है। समारोह का संचालन करते हुए प्राधिकार के सचिव सह सब जज 6 श्वेता सिंह ने बताई कि पक्षकारों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो इसका ख्याल रखते हुए 21 न्यायिक बेंच का गठन हुआ है। जिसमें 17 न्यायिक बेंच व्यवहार न्यायालय परिसर मोतिहारी में,3 न्यायिक बेंच अनुमंडलीय न्यायालय सिकरहना ढाका व एक न्यायिक बेंच अनुमंडलीय न्यायालय अरेराज में बनाया गया है। समारोह का धन्यवाद ज्ञापन प्रथम अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रसेनजीत सिंह ने की।