
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
गुरुवार को प्रातः बड़े जैन मंदिर जी में श्री शान्तिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गयी। उसके पश्चात श्री जी की शांतिधारा की गयी। योगेश कुमार जैन सुषमा जैन को आज के सौधर्म इंद्र बनने का अवसर प्राप्त हुआ।इसके बाद नित्य नियम पूजा की गई तत्पश्चात विधान की क्रियाएं प्रारंभ हुई। विधान में बहुत सुंदर और भव्य समवशरण बनाया गया। समवशरण की गंधकुटी में चारों दिशाओं में श्री जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा चार प्रतिमाएं विराजमान की गयी। विधान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विधान में इंद्र इंद्रानी बने महिला पुरुष ने भक्ति भाव से जमकर नृत्य किया। इस अवसर पर प्रवचन देते हुए जैन मुनि आचार्य श्री भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि सब पर्वों में बड़ों अठाई पर्व है। अष्टहानिका महापर्व एक वर्ष में तीन बार आते है। अष्टहानिका महापर्व की महिमा इतनी अद्भुत और विशाल है कि जिसका कोई भी पार नहीं पा सकता।हमें पर्व की मिलजुलकर भक्ति भाव पूर्वक मनाना चाहिए। हर जगह की जैन समाज को अपने जीवन में इन आठ दिनों में ज्यादा से ज्यादा संयम को धारण करते हुए जिनेन्द्र भगवान की भक्ति करना चाहिए। विधान का आयोजन करना चाहिए। प्रभु भक्ति ऐसे करना चाहिए की इस संसार में कोई अपना नहीं है ये संसार के सपने सब झूठे हैं।इस दौरान जैन समाज के प्रधान मनोज जैन, महामंत्री निपुण जैन, अमित जैन, राकेश जैन,नवीन जैन, ललित जैन, सुधीर जैन, आर्जव जैन, पुष्पेंद्र जैन, शशांक जैन, अंशुल जैन,भूपेंद्र जैन, अभिषेक जैन, अरिहंत जैन, सहित समाज के सैकड़ों महिला पुरुष मौजूद रहे।
