
मोतिहारी राजन द्विवेदी।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के प्राणी विज्ञान विभाग ने आचार्य बृहस्पति सभागार में “पर्यावरण की रक्षा क्यों और कैसे करें” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
मुख्य वक्ता उत्तर बिहार के प्रांत संयोजक सुधांशु मिश्रा ने कहा “बीज दान महादान है”। उन्होंने कहा कि एक छोटा बीज भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण को बचाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार बनता है। उन्होंने वृक्षारोपण और बीज संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. कुशाग्र ने भारतीय संस्कृति और प्रकृति के संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराओं में नदियों, वृक्षों, पर्वतों को पूजनीय मानकर पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अंग बनाया गया है। सांस्कृतिक गतिविधियों से पर्यावरण जागरूकता को मजबूत किया जा सकता है।
जीव विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रणवीर सिंह ने कहा “प्रकृति ही आदि है और प्रकृति ही अंत है”। उन्होंने ऋषि-मुनियों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव और प्रकृति का संबंध अटूट है। पर्यावरण संरक्षण विकल्प नहीं, मानव अस्तित्व की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 55 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। इस सम्मान से विद्यालयों के प्रयासों को नई पहचान मिली।
अध्यक्षता अत्रिज्ञान पाल ने की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुंदन किशोर रजक और मंच संचालन रश्मि मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. एस. चौरसिया, नवनीत कुमार गिरि, प्रो. अखिलेश सिंह, डॉ. विनय सिंह समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, छात्र और स्कूलों के शिक्षक उपस्थित रहे।
समापन पर सभी प्रतिभागियों ने हरित, स्वच्छ और स्वस्थ पृथ्वी के लिए पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
