*मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भीषण आग लगने से 10 की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे*

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*उमेश सहनी राज्य व्यूरो बिहार*

शहर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हास्पिटल में भीषण आग लग गई। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड में लगी, जिसके बाद पूरे भवन में धुआं फैल गया और अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। जबकि 30 से ज्यादा मरीज घायल बताए जा रहे हैं।

*इन मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है*
•शशांक कुमार, औराई, मुजफ्फरपुर
•⁠गीता देवी, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर
•⁠उदय कुमार, तरियानी, शिवहर
•⁠कृष्ण नंदन
•⁠चंचला कुमारी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगते ही अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई।

*एसकेएमसीएच में अब तक चार शव प्रसाद हॉस्पिटल से लाया गया*
*1. मृतक उदय कुमार विशंभरपुर शिवहर*
चार दिन से भर्ती थे। ब्रेन सर्जरी होने के बाद प्रसाद में भर्ती थे। बेटी – छोटी कुमारी। मृतक एलआईसी एजेंट थें। 5-6 दिन से भर्ती थे। इनसे मिलने पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा अस्पताल में थी। साला नीतीश भी थी। सभी लोग साथ में थे। शोर होने पर जानकारी मिलें थे। ग्राउंड फ्लोर पर थे। दौड़े-दौड़े गए तो जल चुके थे।

*2. गीता देवी, पति इश्वर ठाकुर, दिस्तौलिया, कथैया*
एक को भर्ती हुई थी। सुगर व बीपी से ग्रसित थी। डायलिसिस चल रहा था। लड़का अनीश ठाकुर ने बताया।

*3. मृतक शशांक, पिता संजय चौधरी, रतनपुरा, औराई*

*4.कृष्णनंदन सिंह, 78 वर्ष, पिता जानकी सिंह, गोरिगमा डीह, मीनापुर*

डा. संजीव के यूनिट में इलाजरत थे। फेफड़ा में पानी था। 22 मई से भर्ती थे।

आईसीयू में मौजूद मरीजों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। देखते ही देखते जहरीला धुआं पूरे अस्पताल में फैल गया, जिससे कई मरीजों की हालत और गंभीर हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन कर्मियों ने तत्काल रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया और अस्पताल के विभिन्न वार्डों में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया।

कई मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें आसपास के सुरक्षित अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। जब दमकल की टीम अस्पताल पहुंची तो आईसीयू वार्ड पूरी तरह धुएं से भरा हुआ था।

बचाव अभियान के दौरान कई मरीजों को गंभीर स्थिति में बाहर निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि कई मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

कई परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर वहां से चले गए। इससे कई मरीज समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच गए।

एक पीड़ित स्वजन ने बताया कि उनके पिता आईसीयू में भर्ती थे और आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकालने में काफी देर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं की गई। परिजनों का यह भी कहना है कि हादसे के बाद मृतकों के शवों की जानकारी देने में भी अस्पताल प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया।

अग्निशमन अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि जब उनकी टीम मौके पर पहुंची तो अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां मौजूद नहीं था। इस तथ्य ने अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। मृतकों की संख्या और हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

वहीं, घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों को लेकर बहस छेड़ दी है।  

*13 बेड के वार्ड में 15 मरीज*
DM सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि 13 बेड लगे हुए थे, जिसमें 15 मरीज भर्ती थे। अभी 3 मरीजों के मरने की पुष्टि हुई है। आग की घटना के चलते ICU वार्ड के इंचार्ज भी झुलस गए हैं, जिन्हें बगल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों का भी रेस्क्यू कर आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

*बुजुर्ग महिला ने जान बचाकर गार्ड को जानकारी*
बीपी लो होने के बाद एक बुजर्ग महिला को इसी ICU वार्ड में भर्ती कराया गया था। आग लगने की घटना के बीच महिला ने न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि गार्ड को भी घटना के बारे में बताया।

93 साल की मरीज ने आग लगने की जानकारी दी

चश्मदीदों का आरोप है कि, मौत का आंकड़ा छिपाने के लिए पुलिस घटनास्थल से जल्दबाजी में शवों को लेकर चली गई। लोगों का कहना है कि अगर आग लगने के बाद समय पर पानी की व्यवस्था की गई होती तो मृतकों की संख्या कम हो सकती थी।

ICU में एडमिट 93 साल की राधा देवी ने बताया, ‘मैं ICU में एडमिट थी। अचानक वार्ड में धुआं उठने लगा। मैंने तुरंत अपना ऑक्सीजन मास्क हटाया और वार्ड से बाहर आ गई। बाहर आकर गार्ड को जानकारी दी कि अंदर आग लगी है।’

*‘बेड पर लोग छटपटा रहे थे, स्टाफ भाग गया’*
स्थानीय निवासी धीरज गिरी ने बताया, ‘मैं अस्पताल की छत पर सो रहा था। अचानक चिल्लाने की आवाज आई। नीचे आकर देखा तो लोग जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे। कुछ लोग अस्पताल के स्टाफ को डांट रहे थे। वार्ड में धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।’

परिजन का ये भी आरोप है कि आग लगने के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों को तड़पता छोड़कर भाग गए। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने भी दावा किया कि जब हमारी टीम घटनास्थल पर पहुंची, तब अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां मौजूद नहीं था।

*DM बोले- ICU में 15 मरीज थे*
मुजफ्फरपुर के DM सुब्रत कुमार ने कहा, ‘अस्पताल की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ परिजन आरोप लगा रहे हैं कि उनके मरीज वार्ड से गायब हैं। हर पहलू की जांच की जा रही है।’

*मरीजों के स्वजनों ने डीएम से बताई आपबीती*
डीएम ने मरीजों के स्वजनों से बात की। इस दौरान मरीजों ने अस्पताल की अव्यवस्था के बारे में शिकायत की। मरीजों के स्वजनों ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल सिस्टम काम नहीं कर रहा था।

एक स्वजन ने बताया कि सीढ़ी का गेट बंद था, जिसकी वजह से लोगों को नहीं बचाया जा सका। उनका कहना है कि अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।