चंपारण की खबर::नव संवत्सर के साथ वासंतिक (चैत्र) नवरात्र का आरंभ 19 मार्च गुरुवार से : सुशील पांडेय

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मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा (एकम) तिथि से सनातन धर्म का सर्वमान्य नव संवत्सर का आरंभ होता है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। देशभर में इस नव संवत्सर को विभिन्न स्वरूप और परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। तदनुसार 19 मार्च गुरुवार से रौद्र नामक नव संवत्सर 2083 प्रारंभ होगा और इसी के साथ वासंतिक (चैत्र) नवरात्र भी प्रारंभ होगा। चैत्र नवरात्र में आद्यशक्ति जगदम्बा के साथ नवगौरी के दर्शन-पूजन व दुर्गा सप्तशती के पाठ का पुण्यफलदायक विधान है।
उक्त जानकारी महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।
उन्होंने बताया कि 19 मार्च गुरुवार को चैत्र नवरात्र पूजन के निमित्त कलशस्थापन अनुदया प्रतिपदा तिथि में प्रातःकाल 06:40 बजे के बाद किसी भी समय किया जा सकता है। अष्टमी तिथि की महानिशा पूजा 25 मार्च बुधवार की मध्य रात्रि में होगी,वही महा अष्टमी व्रत करने वाले श्रद्धालु 26 मार्च गुरुवार को व्रत करेंगे। महा नवमी का व्रत एवं रामनवमी का पुण्य पवित्र पर्व 27 मार्च शुक्रवार को मनाया जाएगा। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दिन से ही श्रीरामचरितमानस की रचना आरंभ की थी। नवरात्र अनुष्ठान व व्रत के समापन से संबंधित पूजन-हवन आदि भी 27 मार्च शुक्रवार को ही नवमी तिथि पर्यन्त अर्थात् दिन 12:02 बजे तक किया जा सकेगा। नवरात्र व्रत का पारण 28 मार्च शनिवार को प्रातः 05:55 बजे के उपरान्त दशमी तिथि में किया जाएगा।
प्राचार्य पाण्डेय ने बताया कि चैती छठ व्रत का नहाय-खाय 22 मार्च रविवार को,खरना 23 मार्च सोमवार को,सायंकालीन अर्घ्य 24 मार्च मंगलवार को तथा प्रातःकालीन अर्घ्य 25 मार्च बुधवार को दिया जाएगा। चैती छठ व्रत का विधान भी कार्तिक मास में पड़ने वाले छठपूजा की तरह ही होता है।