
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
जिले भर में पूजा समितियों ने ज्ञान की देवी मां शारदे की विदाई ‘श्रद्धा और सौहार्द’ के साथ की। ‘जय मां शारदे’ के उद्घोष के बीच भक्तों ने नम आंखों से प्रतिमाओं का विसर्जन किया, लेकिन इस बार सड़कों पर जो अनुशासन दिखा। इस सफलता के पीछे जिले के युवा और सक्रिय पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात की वह ‘रिवॉर्ड पॉलिसी’ है, जिसने विसर्जन के पारंपरिक उल्लास को अनुशासन का नया रंग दे दिया।
आमतौर पर त्योहारों के दौरान पुलिस का चेहरा सख्ती और डंडे वाला होता है, लेकिन मोतिहारी एसपी ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने जिले में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक पहल की शुरुआत की। एसपी स्वर्ण प्रभात ने घोषणा की कि जो भी पूजा समितियां लाइसेंस की शर्तों का शत-प्रतिशत पालन करेंगी, डीजे पर प्रतिबंध का सम्मान करेंगी और निर्धारित रूट का अनुशासन से पालन करेंगी, उन्हें जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। पुलिस की इस ‘पुरस्कार योजना’ का जमीन पर जादू की तरह असर हुआ। युवा समितियों में नियमों को तोड़ने की जगह, सबसे बेहतर नागरिक बनने की होड़ लग गई।
पूरे विसर्जन उत्सव के दौरान मोतिहारी का जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। संवेदनशील इलाकों से लेकर शहर के मुख्य चौराहों तक पुलिस की टीम लगातार भ्रमणशील रही। खुद एसपी स्वर्ण प्रभात सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे और पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे थे। प्रशासन की इसी सक्रियता और जनता के सहयोग का नतीजा रहा कि पूरे जिले में विसर्जन के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं। देर शाम तक घाटों पर मां सरस्वती की प्रतिमाओं का विसर्जन ढंग से पूरा कर लिया गया।
