
बेतिया, राजन द्विवेदी।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बिहार का इकलौता इको टूरिज्म वाल्मीकि टाइगर रिजर्व आज अपने प्राकृतिक और नैसर्गिक सुंदरता को ले देश सहित विदेशों में भी अपनी ख्याति बटोर रहा है। टाइगर रिजर्व में टूर पैकेज पर आए पर्यटकों ने थारू आदिवासी संस्कृतिक झमटा नृत्य को देखकर काफी उत्साहित हुए । वन क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवरों का समीप से दीदार करने के लिए हर रोज सैकड़ों की तादाद में पर्यटक यहां पहुंचते है। विशेष रूप से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के छात्र प्रतिदिन परिभ्रमण पर वाल्मीकि नगर पहुंच रहे हैं।और यहां की प्राकृतिक सुंदरता का दीदार कर रहे हैं।पर्यटक यहां की हसीन वादियों को समीप से निहार सकें। इसके लिए सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार को बिहार सरकार द्वारा दो और तीन दिवसीय टूर पैकेज उपलब्ध कराई जाती है।जिसमें दर्जनों पर्यटक वाल्मीकि नगर पहुंचते हैं।इस दौरान उन पर्यटकों को जंगल सफारी,चलचित्र के माध्यम से वीटीआर का इतिहास की जानकारी भी दी जाती है।वहीं थारू आदिवासियों का पारंपरिक संस्कृतिक झमटा नृत्य का भी आयोजन किया जाता है।इसी क्रम में पटना से दो और तीन दिवसीय टूर पैकेज पर आए पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद उठाया।इस दौरान वे लोग भालू, हिरण,गौड़,मोर सहित कई जानवरों का दीदार समीप से करने का मौका मिला।साथ ही बाघ के पग मार्क भी देखने को मिला।और झमटा नृत्य को देख कर पर्यटक काफी खुश हुए।साथ ही यहां का मनोरम दृश्य देख कर बहुत प्रभावित हुए।इस बाबत जानकारी देते हुए वाल्मीकि नगर वन क्षेत्र के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि पर्यटन पर आए पर्यटकों की संतुष्टि ही हमारी पहली प्राथमिकता है।

