रजौली में सावन के बाद मांसाहारी भोजन की दुकानों पर उमड़ी भीड़

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सावन का पवित्र महीना समाप्त होते ही रजौली में मांसाहारी भोजन की दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हिंदू धर्म में सावन को एक अत्यंत पवित्र मास माना जाता है, जिसमें लोग मांसाहार से परहेज करते हैं। इस साल भी रजौली के निवासियों ने इस परंपरा का पालन किया। सावन के 30 दिनों तक, मीट, चिकन और मछली की दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहा। लेकिन जैसे ही सावन खत्म हुआ, लोग इन खाद्य पदार्थों को खरीदने के लिए बड़ी संख्या में दुकानों पर पहुंच गए।

कीमतें आसमान छू रही हैं :-

बाजार में मांग बढ़ने के कारण मांसाहारी भोजन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। ग्राहकों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि कई दुकानों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
बकरे का मीट 700 रूपये प्रति किलोग्राम, मद्रासी मछली 160 रुपए प्रति किलोग्राम तो तालाब वाली जिंदा
मछली 300 रूपये प्रति किलोग्राम,फॉर्म का चिकन 150 रूपये प्रति किलोग्राम, सोनाली चिकन 400 रूपये प्रति किलोग्राम, देसी चिकन,600 रूपये प्रति किलोग्राम तक बिकी है।
विक्रेताओं के अनुसार,सावन के बाद मांग में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण कीमतें इतनी बढ़ गई हैं।उनका मानना ​​है कि आने वाले दिनों में कीमतें थोड़ी स्थिर हो सकती हैं,लेकिन तब तक ग्राहकों को ऊंची कीमतों पर ही ये सामान खरीदना पड़ेगा।

स्वाद और परंपरा का मेल:-

रजौली के एक स्थानीय निवासी मनीष कुमार सोनी ने बताया, ‘सावन में हम भगवान शिव की पूजा करते हैं और सात्विक भोजन करते हैं।यह एक धार्मिक परंपरा है जिसका हम सब पालन करते हैं। लेकिन सावन खत्म होने के बाद, मांसाहार खाना एक तरह से उत्सव जैसा होता है।आज हम सब परिवार के साथ मिलकर इसका आनंद लेंगे’।यह सिर्फ रजौली की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश में सावन के बाद मांसाहार की मांग बढ़ जाती है।यह धार्मिक आस्था और खाने की पसंद के बीच का एक अनोखा संगम है,जो भारतीय संस्कृति को और भी समृद्ध बनाता है।