
रजौली
प्रखण्ड मुख्यालय समेत आसपास के क्षेत्रों में गली के कुत्तों ने आतंक मचा रखा है।आसपास की कई बकरियों को कुत्ते ने काटकर अपना शिकार बना लिया है।इससे बकरियों के मालिक में भयंकर दहशत व्याप्त है।वहीं कुत्तों के काटने से घायल कई छोटे बच्चे अपने परिजनों के साथ प्रतिदिन अनुमंडलीय अस्पताल पहुंच इलाज करवाने आ रहे हैं।मां संतोषी मंदिर के समीप रहे अनिल यादव ने बताया कि बीते दिन गली के कुत्तों ने उनकी एक बकरी को अपना शिकार बना लिया है।बकरी के कुत्तों द्वारा काट खाने से आसपास के बकरी मालिक में भय व्याप्त है।पुरानी बस स्टैंड निवासी सुरेश राजवंशी ने बताया कि वे बकरी पालन करते हैं।जब बकरियां आसपास के खेतों में चरने जाती है,तो उसकी मां बकरियों पर लगातार नजर बनाए रखती है।इसके पीछे का मुख्य कारण गली के कुत्तों द्वारा बकरियों पर लगातार हमला बताया है।
बारिश के समय बढ़ता है कुत्तों का आतंक :-
जानकार बताते हैं कि बारिश के मौसम में कुत्तों का आतंक बढ़ जाता है।ऐसा इसलिए होता है कि सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को भी ठिकाने की कमी पड़ने लगती है।बारिश में उनके सूखे ठिकाने गीले हो जाते हैं,खाने की तलाश बढ़ जाती है और तेज आवाजें जैसे बिजली या बारिश की गड़गड़ाहट उन्हें डरा देती हैं। यही कारण है कि अक्सर देखा गया है कि मानसून में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।जब कुत्ता डर,भूख और असहजता में होता है,तो वह आक्रामक हो जाता है और इस स्थिति में काटने की संभावना बढ़ जाती है।
अस्पताल में मरीजों को दिया जा रहा एंटीरेबिज :-
अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन कुत्ते के काटने से घालय एक दो बच्चे अपने परिजनों के साथ अस्पताल आते हैं।अस्पताल में प्राथमिक इलाज कर एंटीरेबिज की सुई दी जाती है।उन्होंने आमलोगों से अपील किया कि अंधेरे में अकेले न निकलें,कुत्तों को न छेड़ें,न ही पत्थर या लाठी से डराएं एवं बच्चों को हमेशा बड़ों की निगरानी में बाहर खेलने भेजें।