चंपारण की खबर:: कारगिल युद्ध में 527 सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, 1400 के करीब हुए थे घायल : राधामोहन सिंह शहर के शौर्य स्तम्भ परिसर में कारगिल विजय दिवस समारोह का हुआ आयोजन

Breaking news News बिहार

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

कारगिल विजय दिवस पर आज मोतिहारी स्थित शौर्य स्तम्भ परिसर में कारगिल विजय दिवस का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ, भाजपा के प्रदेश सह संयोजक राकेश रौशन ने किया। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि सांसद पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम सांसद श्री सिंह एवं उपस्थित लोगों ने शौर्य स्तम्भ पर पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में कारगिल युद्ध में अपनी सहभागिता निभाने वाले 60 पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री सिंह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था जो लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ जिसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिन सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के मुताबित दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था।
स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र
पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल
करने का वादा किया गया था लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक
बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम”ऑपरेशन बद्र” रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था।

श्री सिंह ने कहा कि पाकिस्तान यह भी मानता है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के तनाव से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने में मदद मिलेगी। प्रारम्भ में इसे घुसपैठ मान लिया था और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन नियंत्रण रेखा में खोज के बाद इन घुसपैठियों के नियोजित रणनीति के बारे मे पता चला। जिससे भारतीय सेना को एहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर की गयी है। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से दो लाख सैनिकों को कारगिल क्षेत्र में भेजा। यह युद्ध आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। इस युद्ध के दौरान 527
सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया और 1400 के करीब घायल हुए थे।
उक्त अवसर पर बिहार राज्य मछुआरा आयोग के अध्यक्ष ललन सहनी, जिलाध्यक्ष पवन राज, जिला प्रभारी वरूण सिंह, जिला उपाध्यक्ष भाजपा मीना मिश्रा, सुधांशु रंजन एवं विनोद कुशवाहा, महिला मोर्चा अध्यक्ष नीता शर्मा, अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष अब्दुल कलाम, युवा मोर्चा अध्यक्ष बबलू पासवान, महामंत्री योगेन्द्र प्रसाद एवं मार्तण्ड नारायण सिंह, प्रवक्ता साजिद रजा, मीडिया प्रभारी गुलरेज शहजाद, आईटी सेल प्रभारी ऋषभ झा, उत्तरी मंडल अध्यक्ष राजेश कुमार, दक्षिणी मंडल अध्यक्ष राजू वर्मा, मो० शकील, रोहित शर्मा, प्रभात कुमार, रोचक झा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।