
मुजफ्फरपुर: बिहार के बहुचर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में करीब 29 वर्षों बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुजफ्फरपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 की अदालत ने मुख्य आरोपी दीपक कुमार सिंह को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या के साथ-साथ अवैध हथियार के इस्तेमाल के मामले में भी आरोपी को दोषी मानते हुए अलग से सजा और जुर्माना लगाया है।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत आरोपी को उम्रकैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे छह महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। वहीं, आर्म्स एक्ट की धारा 27(1) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है।
यह मामला 16 जुलाई 1997 का है, जब वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के खंजाहाचक गांव में भुटकुन शुक्ला की AK-47 से गोलियों की बौछार कर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया था कि आरोपी दीपक कुमार सिंह ने करीब दो वर्षों तक भुटकुन शुक्ला का विश्वास जीतकर उनके सुरक्षा घेरे में जगह बनाई और उनकी दिनचर्या की पूरी जानकारी जुटाई।
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन भुटकुन शुक्ला अपने हथियारों की साफ-सफाई और पूजा कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी ने अचानक AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया था।
करीब तीन दशक तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। लंबे समय से लंबित इस चर्चित हत्याकांड में आए फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
