रामपुर मनिहारान/सहारनपुर/उप्र/अष्टाह्निका महापर्व पर श्री 1008 शांतिनाथ महामण्डल विधान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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रामपुर मनिहारान
जैन समाज प्रबंधकारिणी समिति के तत्वावधान में परम पूज्य आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज के सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 शांतिनाथ महामण्डल विधान के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह का वातावरण छाया रहा।

बुधवार को प्रातःकाल बड़े जैन मंदिर में भगवान श्री शांतिनाथ का विधि-विधानपूर्वक अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। आज के विधान में डॉ. राजेश जैन एवं डॉ. रश्मि जैन को सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके उपरांत नित्य-नियम पूजा सम्पन्न हुई और विधान की धार्मिक क्रियाएं प्रारंभ हुईं। विधान के दौरान अत्यंत भव्य एवं आकर्षक समवशरण की रचना की गई, जिसकी गंधकुटी में भगवान जिनेन्द्र की प्रतिमा विराजमान की गई। इस दिव्य दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विधान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए धर्मलाभ अर्जित किया। इन्द्र-इन्द्राणी बने महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर भावपूर्ण नृत्य कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि अष्टाह्निका महापर्व जैन धर्म के प्रमुख एवं अत्यंत पावन पर्वों में से एक है, जो वर्ष में तीन बार आता है। उन्होंने कहा कि इन पावन दिनों में प्रत्येक श्रद्धालु को अधिक से अधिक संयम, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना एवं जिनेन्द्र भगवान की आराधना करनी चाहिए। सामूहिक रूप से विधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन समाज में एक नयी जागरूकता आती हैं। प्रभु भक्ति करने से ही जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है।

रिपोर्ट वैभव गुप्ता।