‘सोशियोस्केप्स’: नई शिक्षा नीति को जीवंत अनुभव में बदलता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय का अभिनव आयोजन

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समाज, संस्कृति, कला, कौशल और संवाद का दो दिवसीय रचनात्मक उत्सव

पूर्वी चंपारण की धरती पर स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि नई शिक्षा नीति केवल दस्तावेज़ों तक सीमित अवधारणा नहीं, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर जीवंत अनुभव में बदला जा सकता है। विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा 11 एवं 12 मई 2026 को आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम “सोशियोस्केप्स” इसी सोच का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

यह आयोजन केवल एक विश्वविद्यालयी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि शिक्षा, समाज, संस्कृति, कला और कौशल को जोड़ने वाला ऐसा जीवंत मंच था, जिसने विद्यालय और विश्वविद्यालय के बीच संवाद की नई राह खोली। कार्यक्रम का उद्देश्य था—एकतरफा व्याख्यान आधारित शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए विद्यार्थियों को अनुभवात्मक, रचनात्मक और सहभागितापूर्ण सीखने का अवसर देना।


सांसद राधा मोहन सिंह ने की आयोजन की सराहना

कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा— “विश्वविद्यालय केवल डिग्री नहीं, संवेदनशील नागरिक तैयार करे”

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्वी चंपारण के सांसद Radha Mohan Singh की उपस्थिति रही। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी प्रदर्शनी, कला दीर्घा तथा विभिन्न कार्यशालाओं का अवलोकन किया और विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है और नई शिक्षा नीति युवाओं को नवाचार, कौशल तथा सृजनात्मक चिंतन की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।

उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. Sanjay Srivastava की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने ऐसा वातावरण तैयार किया है जहाँ विद्यार्थी केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करते, बल्कि समाज की जटिल समस्याओं को समझने और उन्हें संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।

कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि “सोशियोस्केप्स” जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक सामाजिक अनुभवों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो समाज के प्रति संवेदनशील हों और सृजनात्मक नेतृत्व क्षमता रखते हों। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को नवाचार, कौशल विकास और बहुआयामी शिक्षा का मंच प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

कैंपस निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षा को जीवन से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक समझ, संवाद कौशल, साइबर जागरूकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की भी आवश्यकता है। “सोशियोस्केप्स” विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक सार्थक पहल है।

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुजीत चौधरी ने कहा कि समाजशास्त्र केवल सिद्धांतों का विषय नहीं, बल्कि समाज को अनुभव करने और उसके प्रति संवेदनशील होने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और नेतृत्व क्षमता विकसित करना था।


कार्यशालाओं ने विद्यार्थियों को दिया अनुभवात्मक सीखने का अवसर

डॉक्यूमेंट्री, मिथिला कला, चित्रकला और साइबर जागरूकता सत्र रहे आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं ने विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर अनुभवात्मक एवं रचनात्मक सीखने का अवसर प्रदान किया।

पहले दिन डॉक्यूमेंट्री एवं फिल्म विश्लेषण कार्यशाला का संचालन विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी तथा टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान से शिक्षित सुश्री शेफालिका मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने दृश्य माध्यमों के जरिए समाज, संस्कृति और रूढ़ धारणाओं की बौद्धिक समझ विकसित करने पर बल दिया। सौरभ पब्लिक स्कूल एवं डायट स्मार्ट एकेडमी के विद्यार्थियों के लिए यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।

दूसरे दिन चित्रकला कार्यशाला का आयोजन जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपराकोठी के शिक्षक डॉ. अजीत कुमार द्वारा किया गया। इसके साथ ही मिथिला से उपस्थित पंडित अमल झा, श्री कौशिक झा एवं डॉ. प्रिया ने मिथिला कला, लोक संस्कृति और भारतीय परंपराओं पर अपने विचार एवं सहभागिता प्रस्तुत की।

साथ ही आयोजित साइबर जागरूकता कार्यशाला में डीएसपी श्री अभिनव पाराशर एवं डीएसपी प्रोबेशन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा, व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता तथा साइबर धोखाधड़ी से बचाव के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी।


सामाजिक विषयों पर विद्यार्थियों की संवेदनशील प्रस्तुतियाँ

‘माइग्रेशन’, ‘पानी का मूल्य’ और ‘सौंदर्य का बोझ’ जैसी विषयवस्तुओं ने खींचा ध्यान

समाजशास्त्र विभाग द्वारा प्रस्तुत ‘माइग्रेशन’ विषयक प्रदर्शनी ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। खुले ट्रंक, बिखरे कपड़े और आते-जाते जूतों के माध्यम से प्रवासी मजदूरों की पीड़ा और विस्थापन की त्रासदी को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया।

इसके अतिरिक्त “पैसे की यात्रा”, “पानी का मूल्य” तथा “महिलाओं पर सौंदर्य का बोझ” जैसे सामाजिक विषयों पर विद्यार्थियों ने अत्यंत संवेदनशील एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।


‘फूड कल्चर ज़ोन’ बना आकर्षण का केंद्र

विद्यार्थियों ने सीखे उद्यमिता, श्रम और प्रबंधन के व्यावहारिक पाठ

विश्वविद्यालय परिसर का खुला क्षेत्र भारत के “फूड कल्चर ज़ोन” में तब्दील हो गया था, जहाँ विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार स्वच्छ एवं पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए।

छात्रों ने केवल भोजन नहीं बेचा, बल्कि श्रम, उद्यमिता और प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया। “निठल्ले पानीपुरी”, “निंबू पानी”, “आम पन्ना” तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों द्वारा संचालित “बिहारी ठेकुआ ऑल ओवर इंडिया” जैसे स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहे।


कला, संस्कृति और रचनात्मकता का जीवंत संगम

सांस्कृतिक संध्या में विद्यार्थियों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग

मिथिला कला तथा पेंसिल पर लीड कैरिकेचर बनाने वाले छात्र श्री प्रशांत की कला ने भी लोगों को विशेष रूप से आकर्षित किया। बताया गया कि वे तीन बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए आवेदन कर चुके हैं।

12 मई की सांस्कृतिक संध्या में पूर्वी चंपारण के जिला विकास आयुक्त श्री प्रदीप कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कैंपस निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने उन्हें अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

श्री प्रदीप कुमार ने प्रदर्शनी, कला दीर्घा एवं फूड स्टॉल का अवलोकन करने के बाद कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं की रचनात्मक क्षमता, सामाजिक समझ और उद्यमिता को नई दिशा देने वाला प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता, नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता की सीख देते हैं तथा नई शिक्षा नीति की भावना को वास्तविक रूप में सामने लाते हैं।

शांति निकेतन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने श्री माधवेंद्र कुमार के निर्देशन में सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिसके उपरांत प्रो. प्रसून दत्त सिंह एवं श्री प्रदीप ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए। अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति के लिए सुश्री ख्वाहिश को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मोतिहारी के न्यायिक दंडाधिकारी श्री गौरव सिंह ने भी प्रदर्शनी एवं फूड स्टॉल का अवलोकन किया तथा सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक समझ विकसित करते हैं।


विद्यार्थियों और शोधार्थियों के प्रयासों से सफल हुआ आयोजन

दो दिवसीय यह आयोजन संगीत, कला, संवाद, कौशल और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा। अंत में समाजशास्त्र विभाग द्वारा इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय कर्मचारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।

विभाग ने कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत, शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी तथा विश्वविद्यालय परिवार के सहयोग के बिना “सोशियोस्केप्स” जैसे रचनात्मक एवं बहुआयामी आयोजन को सफल बनाना संभव नहीं था।