
मुजफ्फरपुर।
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के कुशल निर्देशन में प्रशासन द्वारा जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, दूर-दराज के इलाकों में दवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ पैथोलॉजिकल जाँच सुविधाओं को भी सुगम बनाने के उद्देश्य से एक व्यवस्थित पहल की जा रही है,
जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब मुजफ्फरपुर के मरीजों को गंभीर बीमारियों की पैथोलॉजी जांच के लिए निजी लैब के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना होगा। सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि मुजफ्फरपुर में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल को अमली जामा पहनाने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नई व्यवस्था के तहत मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल को मुख्य ‘हब’ प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि जिले के सभी अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसके नेटवर्क से ‘स्पोक’ के रूप में जुड़े रहेंगे।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने बताया कि इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अपना नमूना देने के लिए शहर आने की आवश्यकता नहीं होगी। मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही खून या अन्य जांच के नमूने दे सकेंगे, जिन्हें विशेष रनर के जरिए सुरक्षित तरीके से सदर अस्पताल स्थित हब लैब तक पहुंचाया जाएगा। नमूनों को ले जाने के लिए तापमान नियंत्रित कोल्ड-चेन बॉक्स का इस्तेमाल होगा ताकि जांच की सटीकता प्रभावित न हो। इससे ग्रामीणों को जांच के लिए शहर आने के झंझट और यात्रा के खर्च से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
- हाई-टेक मशीनों से लैस होगी जिला प्रयोगशाला
सदर अस्पताल स्थित इस हब लैब में सात प्रकार की अत्याधुनिक स्वचालित मशीनें स्थापित की जाएंगी। इनमें फुली ऑटोमेटेड बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, हेमेटोलॉजी एनालाइजर, एलाइजा रीडर और यूरिन एनालाइजर जैसी मशीनें शामिल हैं। इन मशीनों के जरिए होने वाली जांचें न केवल सटीक होंगी, बल्कि पूरी तरह नि:शुल्क भी रहेंगी। निजी लैब में जिन जांचों के लिए हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे, वे अब सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलेंगी। एजेंसी को कार्यस्थल मिलने के 90 दिनों के भीतर इन सभी मशीनों को स्थापित कर सेवा शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
डिजिटल रिपोर्टिंग से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत:
मरीजों की सुविधा के लिए समय सीमा और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। सदर अस्पताल यानी हब में नमूना एकत्र होने के 12 घंटे के भीतर और प्रखंड स्तर यानी स्पोक केंद्रों पर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट तैयार होते ही मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जाएगी। मरीज घर बैठे ‘भव्या ‘ पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी रिपोर्ट डाउनलोड कर सकेंगे। रिपोर्ट देखने के लिए मरीज के मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिससे उनकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
गुणवत्ता और 24 घंटे उपलब्धता पर विशेष जोर:
जांच की रिपोर्ट में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त निगरानी तंत्र बनाया गया है। सदर अस्पताल की यह हब लैब 24 घंटे और सातों दिन क्रियाशील रहेगी। सेवा प्रदाता एजेंसी को हर महीने कम से कम एक प्रतिशत नमूनों की जांच किसी बाहरी एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से करानी होगी। इसके अलावा मशीनों की नियमित जांच और अंशांकन भी किया जाएगा ताकि मरीजों को मिलने वाली हर रिपोर्ट सौ फीसदी सही हो। इस नई पहल से मुजफ्फरपुर के लाखों लोगों को समय पर और विश्वस्त इलाज मिल सकेगा।
केमिकल और किट की आपूर्ती से दूर हुई जांच की बाधा:
सदर अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से केमिकल एजेंट और किट की कमी के कारण पैथोलॉजी जांच में आ रही बाधा अब पूरी तरह दूर हो गई है। सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि इन रसायनों और किट के लिए पूर्व में ही इंडेंट भेजा जा चुका था, जिसकी आपूर्ति अब अस्पताल को प्राप्त हो गई है। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि स्टॉक उपलब्ध न होने से मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई। अब सभी आवश्यक किट एवं केमिकल लैब में पहुंच चुके हैं, जिससे रुकी हुई जांचें पुनः सुचारू रूप से शुरू कर दी गई हैं। इससे मरीजों को अब निजी लैब जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
