
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी मोतिहारी का कार्यलय व जिला शिक्षा पदाधिकारी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए है।
कार्यालय में फैली अराजकता व दलाली प्रथा को बंद करने को लेकर शिक्षक संघ के नेता सुनील राय आज अपने सहयोगियों के साथ अपनी 11 सूत्री मांगों के साथ आमरण अनशन आन्दोलन पर बैठ गए।
वही उक्त मामले को लेकर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ, गोप गुट के संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष नासिर खान ने भी गत दिनों जिलाधिकारी को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
श्री खान ने अपने पत्र में चार शिक्षकों का नाम अंकित करते हुए उनके कार्यालय में कार्य करते व अधिकारियों के साथ कार्यालय अवधि में कार्य करते व बैठे की तस्वीर भी दी है। जिसमें परीक्षा कोषांग का प्रधान सहायक के साथ कार्य करते शिक्षक मोहम्मद जहीरुद्दीन, एचआरएमएस/ सीएफएमएस कोषांग में कार्य करते शिक्षक इमामुद्दीन उर्फ बेताब, डीपीओ स्थापना के साथ कार्यालय अवधि में पूरे शान के साथ बैठकर तस्वीर खिंचवाते हुए शिक्षक मोहम्मद हारून राशिद जिनके ने भी एचआरएमएस / सीएफएमएस कोषांग में कार्य किया जाता है। जिला शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष पैर पर पैर चढ़ाकर बैठे हुए शिक्षक की तस्वीर है। जिनके संबंध में बताया जाता है कि ये जिला शिक्षा पदाधिकारी के मुख्य सलाहकार के रूप में जाने जाते है।
कहा है कि कार्यालय में वर्षों से लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की जाय तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कार्यालय अवधि में ये सभी शिक्षक प्रतिदिन कार्य करते है या नही। वही कई शिक्षक व संघ के नेताओं के द्वारा बताया जा रहा है कि कार्यालय में शिक्षकों के द्वारा ही शिक्षकों के वेतन, व बकाया वेतन, तमाम प्रकार के अन्य भुगतान कार्य, परीक्षा कोषांग तथा अन्य मुख्य कार्य भी किया जा रहा है।
वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी का मुख्य सलाहकार भी शिक्षकों को ही बताया जाता है।
अनशनकारियों ने बताया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री गिरी वरीयता में काफी नीचे है इसके बावजूद अपने पहुंच बल से जिला शिक्षा पदाधिकारी का पद हासिल किए हैं। यह भी कहा जाता है की जून माह में इनको डीईओ पद से नही हटाया जाता है तो विभाग व सरकार के विरुद्ध जनहित याचिका भी दायर किया जा सकता है। वरीयता क्रम में श्री गिरी 90 वें स्थान पर है जबकि इनके ऊपर लगभग एक दर्जन से अधिक वरीय अधिकारी कहीं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी है तो कई उप निदेशक के पद पर कार्य कर रहें हैं। बहराल इनके पदस्थापन से जहां विभाग पर उंगलियां उठने लगी है वहीं सरकार भी कटघरे में है।
बहराल अब देखना यह है कि क्या शिक्षक सुनील राय का आमरण अनशन सफल होगा? क्या नासिर खान की शिकायत रंग लाएगी? क्या जिलाधिकारी एक्शन लेंगे।
