
पाक्षिक काव्य गोष्ठी कार्यक्रम में दिल को छू देने वाली कविता के माध्यम से श्रद्धा सुमन किया गया अर्पित।
जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।
जहानाबाद -नागरिक विकास मंच की पाक्षिक काव्य गोष्ठी इस बार कुछ अलग ही रंग में सजी। मंच पर कविता थी, सुर थे, और यादों की ऐसी हल्की चुभन भी थी, जो दिल को नम कर दे। अवसर था जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े संतोष श्रीवास्तव की माताजी स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव जी की 18वीं पुण्यतिथि का, जिसे साहित्य और संगीत के साथ श्रद्धांजलि याद किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के उपाध्यक्ष सह एससी.एसटी. कर्मचारी संघ जहानाबाद के जिला अध्यक्ष डॉ. अरविंद चौधरी(प्र.अ.) ने की, जबकि संचालन स्वयं संतोष श्रीवास्तव ने किया। मंच पर बैठे साहित्यकारों ने कहा—
“मा॑ का नाम जब मंच पे आया,
तो हर दिल में एक दीप जलाया।”
गोष्ठी में आरा के विशेष लोक अभियोजक (उत्पाद) योगेश्वर प्रसाद उर्फ हीरा जी, वयोवृद्ध साहित्यकार सत्येंद्र कुमार मिश्र, लोकगायक विश्वजीत अलबेला, शिक्षिका रूबी शर्मा, सुनील कुमार श्रीवास्तव (मामा जी), उद्घोषक व गायक एस. के. मिर्जा, शिक्षाविद संतोष शर्मा(निदेशक द बिंग पब्लिक स्कूल), लोक कलाकार मुकेश जी (मुखिया जी), अमला श्रीवास्तव और श्रृषी राज श्रीवास्तव ,अनिल गुप्ता,सहित कई साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
मगही गायक विश्वजीत अलबेला, अरविंद कुमार आज़ाद, कवियत्री रूबी मैडम’ मुकेश जी उर्फ मुखिया जी अजय विश्वकर्मा और एस. के. मिर्जा ने गीत-कविता के माध्यम से श्रद्धा के फूल अर्पित किए। उनके सुरों में माँ की ममता, यादों की गरमाहट और जीवन के संस्कारों की खुशबू साफ महसूस हुई।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा—
माँ का जीवन सादगी की गाथा,
संस्कारों का दीप जलाता।
ऐसे जीवन की स्मृति में,
हर दिल श्रद्धा से झुक जाता।”
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव जी के सादगी, सेवा और संस्कार के मूल्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ अरविंद चौधरी ने स्व. चंद्रकांति श्रीवास्तव जी के पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर कहा कि उनके निस्वार्थ प्रेम, त्याग और आशीर्वाद सदा याद रहेगा , और कहा – नैनन में है जल भरा, आंचल में आशीष । तुम सा दूजा नहि यहां, तुम्हें नवायें शीश।। स्व. चंद्रकांति श्रीवास्तव जी अमर रहे, अमर रहे, अमर रहे।।
