
इस दौरान
उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती समारोह सह पराक्रम दिवस पर बोलते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम कुमार ने कहा कि आज हम सब यहाँ यत्र_तत्र_से एकत्र हो पराक्रम दिवस के अवसर पर एक ऐसे महानायक को नमन करने के लिए इकट्ठे हुए हैं, जिनका जीवन स्वयं में साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की अद्भुत गाथा है—वे हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, वे एक विचार थे—ऐसा विचार जो गुलामी को स्वीकार नहीं करता, जो अन्याय के सामने झुकता नहीं और जो राष्ट्र के सम्मान के लिए हर बलिदान को तैयार रहता है।

उन्होंने हमें सिखाया कि स्वतंत्रता माँगने से नहीं, संघर्ष से मिलती है। उनका प्रसिद्ध नारा—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”—आज भी हर भारतीय के रग-रग में जोश भर देता है। यह नारा केवल शब्द नहीं था, यह उस पराक्रम का आह्वान था जिसने लाखों युवाओं को आज़ाद हिंद फौज से जोड़ दिया।नेताजी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्चा देशप्रेम भाषणों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखाई देता है। उन्होंने अपने आराम, पद और सुरक्षित भविष्य को त्याग कर माँ भारती की सेवा का मार्ग चुना।*

*आज के समय में, पराक्रम दिवस हमें आत्ममंथन करने का अवसर देता है—*
*क्या हम अपने कर्तव्यों को उतनी ही निष्ठा से निभा रहे हैं क्या हम राष्ट्र के प्रति उतने ही ईमानदार हैं यदि हम अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, साहस और अनुशासन को अपनाएँ, तो यही नेताजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।*
*एक ऐसे महान व्यक्तित्व जो पद और संसाधनों की चुनौती से सदा_सर्वदा ऊपर रहे। परमवीर, पराक्रमी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी को पूरी दुनिया नेताजी मानती थी। हम सब संकल्प लेकर नेताजी का आदर्श पर चलकर भारत को विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाने का संकल्प लें। इससे बेहतर आज का दिन और कुछ हो नहीं सकता।आइए, इस पराक्रम दिवस पर संकल्प लें कि हम एक सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।इस मौके पर
अनिल: बबीता सिंह, अंजलि, श्रेया सिंह, सोनी कुमारी, सविता, सृष्टि,गौतम कपूर, सहदेव विश्वकर्मा, डॉ संजय, विजय भगत, राजेश, राजू राज, नबीन कुमार मंटू, बिमल सिंह, शशि भूषण पार्षद, डॉ परमानंद, मनीष कुमार, प्रिंस कुमार, चंदन कुमार, दीपक कुमार, उपेन्द्र चंद्रवंशी, बब्लू मौजूद थे
