
आयुष्मान आरोग्य मंदिर व आंगनबाड़ी केंद्रों की गहन जांच, मानकों से विचलन पर होगी सख्त कार्रवाई
महिला एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार के लिए जिलाधिकारी के आदेश पर स्वास्थ्य–पोषण सेवाओं की हुई सघन जांच
मुजफ्फरपुर,
15 जनवरी,2026
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में ठोस और गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन के आदेश पर 14 एवं 15 जनवरी को जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के अंतर्गत हेल्थ वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) एवं आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं, सेवाओं और मानकों के अनुरूप संचालन की गहन जांच की गई। अभियान में जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों को नामित किया गया तथा उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे विभागीय दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप निरीक्षण सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की नियमित उपस्थिति, उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति, पंजी संधारण, दवाओं एवं उपकरणों की उपलब्धता, आधारभूत संरचना तथा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का सूक्ष्म निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि संस्थागत प्रसव, चाइल्ड बर्थ, नवजात शिशु देखभाल, परिवार नियोजन, ओपीडी सेवाएं, लेबर रूम की स्थिति, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, पुरुष एवं महिला वार्ड, पेयजल, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रभावी ढंग से संचालित हो रही हैं या नहीं।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि सभी बिंदुओं की जांच के उपरांत विहित प्रपत्र में प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से संबंधित प्रतिवेदन सिविल सर्जन को सौंपा जाना है, ताकि विभागीय स्तर पर समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाया जा सकें।
इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों की भी व्यापक जांच की गई। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों की भौतिक स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं, सेविका एवं सहायिका की उपस्थिति, उनके द्वारा निर्धारित पोशाक के उपयोग, वजन मशीन की क्रियाशीलता, आईईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) सामग्री की उपलब्धता, खाना बनाने एवं बच्चों को खिलाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों की स्थिति, साफ-सफाई की व्यवस्था, टीएचआर (टेक होम राशन) वितरण, टीकाकरण गतिविधियां, गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रमों के आयोजन की वास्तविक स्थिति की जांच की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित सभी बिंदुओं का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करते हुए प्रतिवेदन तैयार करें और उसे जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ), आईसीडीएस को उपलब्ध कराएं। इसके पश्चात स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस से प्राप्त सभी प्रतिवेदन को समेकित कर जिला पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। समेकित प्रतिवेदन के आधार पर जहां भी अनियमितता, लापरवाही अथवा मानकों से विचलन पाया जाएगा, वहां नियमानुसार अपेक्षित कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस की नियमित रूप से गहन समीक्षा की जाती रही है। हाल की समीक्षा बैठक के दौरान कई बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी का स्पष्ट मानना है कि महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की स्थिति में सुधार जिले के सामाजिक विकास का आधार है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है।

जिलाधिकारी ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। इन संस्थानों के माध्यम से ही गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों एवं किशोरियों को समय पर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि इन केंद्रों का संचालन मानकों के अनुरूप नहीं होगा, तो योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाएगा। इसी उद्देश्य से यह जांच अभियान चलाया गया है ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके और सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सेवा गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाना है। निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाएगी और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

जिलेभर में चलाए गए इस दो दिवसीय जांच अभियान को ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
