
शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष कुमार रंजन को पुलिस ने किया गिरफतार।
जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।
जहानाबाद – जिले के बेटी के साथ हुई अमानवीय व्यवहार के फलस्वरूप बीते 11 जनवरी को पटना के वेदांता अस्पताल में इलाज के क्रम में मौत हो गई थी। वहीं बेटी के साथ घिनौना हरकत एवं साक्ष्य को छुपाने के खिलाफ पटना में परिजनों द्वारा अपराधियों की गिरफ्तारी एवं गर्ल्स हॉस्टल संचालक एवं प्रभात अस्पताल के चिकित्सकों तथा चित्रगुप्त नगर थाना अध्यक्ष पर कार्रवाई करने को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया था।
हालांकि छात्रा गायत्री पर किए गए जुल्म के खिलाफ लोगों ने मजबूती से आवाज उठाया, और हकिकत सामने आया।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पटना सदर -1 ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर पुस्टी की है कि छात्रा के साथ घिनौना कार्य किया गया है। तथा तत्पश्चात शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष कुमार रंजन को गिरफतार कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस इस घृणित कार्य को छुपाने का प्रयास क्यों कर रही थी। क्यों शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक को बचाने का प्रयास किया जा रहा था। प्रभात अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा छात्रा को नशा की गोली खाने को लेकर बदनाम क्यों किया गया था। चित्रगुप्त नगर थाना अध्यक्ष चुकी वो महिला है फिर भी एक बच्ची के साथ हुई घटना को क्यों लिपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्या पटना में संचालित गर्ल्स हॉस्टल में पढ़ने वाली छात्राएं सुरक्षित नहीं है।इन सभी सवालों के साथ कई अहम सवाल सवाल खड़ा हो रहा है। क्यों नहीं पटना में संचालित गर्ल्स हॉस्टल पर सरकार निगरानी एवं कार्रवाई करती।
वहीं आज बृहस्पति बार को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव मृतक छात्रा की पैतृक गांव शकूराबाद थाना क्षेत्र के पतिआवाॅ पहुंच, परिजनों से मिलकर जानकारी ली, तथा कई अहम सवाल उन्होंने उठाया, और गर्ल्स हॉस्टल पर कार्रवाई करने के साथ साथ पुलिस की रवैया पर भी बड़ा सवाल उठाया। वहीं उन्होंने सरकार को भी आड़ो हाथ लेते हुए, सरकार को ही इस घटना की जिम्मेवार बताया। उन्होंने बेटी के इंसाफ के लिए सदन में भी मामले को उठाने की बात कही।

मामला बहुत ही गम्भीर तथा दिल को झकझोर देने वाली है। आखिर कब तक बेटीयों के साथ अत्याचार होता रहेगा। हालांकि परिजनों ने बार बार बेटी के साथ हुए अत्याचार की बात कह कार्रवाई तथा दोषियों को फांसी की मांग पुरजोर कोशिश किया जा रहा है।अब देखना है कि सरकार कब दोषियों को गिरफतार करती है, और फांसी की फंदा तक ले जाने का प्रयास करती है।
