
फुलवारी शरीफ. मातृ स्वास्थ्य और शिशु सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गंभीर चुनौती मातृ एनीमिया को लेकर एम्स पटना में सोमवार को राष्ट्रीय स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया. देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, सरकारी अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यदि एनीमिया पर काबू नहीं पाया गया तो यह मातृ और शिशु मृत्यु दर को और बढ़ा देगा.एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. सौरभ वाष्र्णेय ने कहा कि एनीमिया भारत में प्रजनन आयु की लगभग 50 फीसदी महिलाओं को प्रभावित करता है, जिनमें बिहार और झारखंड सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं. उन्होंने कहा कि “एनीमिया से न केवल गर्भवती महिला की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि नवजात शिशु का स्वास्थ्य और मानसिक विकास भी खतरे में पड़ जाता है.”एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट बताती है कि बिहार की 63.6 फीसदी महिलाएं और 63.1 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. सम्मेलन में विशेषज्ञों ने चेताया कि आयरन की कमी एनीमिया का प्रमुख कारण है, और गर्भवती महिलाओं में 80 फीसदी मध्यम और 90 फीसदी गंभीर एनीमिया के मामले इसी वजह से सामने आते हैं.

आरएमएलआईएमएस लखनऊ के निदेशक व एम्स पटना के पूर्व डीन प्रो. (डॉ.) सीएम सिंह ने कहा कि “यदि मां एनीमिक है तो बच्चा भी एनीमिक पैदा होगा. हमें इस दुष्चक्र को तोड़ना होगा.” वहीं बिहार सरकार की मातृ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आकांक्षा सुमन ने कहा कि “हमारे पास हरी सब्जियों और पोषण की कमी नहीं है. जरूरत है जागरूकता और सही परामर्श की.”सम्मेलन में भारत सरकार के “एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम” के तहत लागू डिजिटल नैदानिक उपकरणों, आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स, और नई इंट्रावीनस आयरन थेरेपी जैसी नवाचारों पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण, दवाओं की उपलब्धता और समुदाय की भागीदारी एनीमिया नियंत्रण की कुंजी है.सम्मेलन का आयोजन एम्स पटना के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजय पांडे के नेतृत्व में हुआ. पैनल में डॉ. कृष्ण पांडे (आईसीएमआर), डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव, डॉ. प्रियंका बंसल, डॉ. श्रीधर श्रीकांतिया, डॉ. आभा रानी सिन्हा, डॉ. नीरज अग्रवाल और डॉ. स्वयं प्रज्ञान परिदा सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे.सम्मेलन के समापन पर सभी हितधारकों ने यह संकल्प लिया कि मातृ एनीमिया न्यूनीकरण सिर्फ स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्राथमिकता का विषय है. बिहार समेत पूरे देश को इस चुनौती से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय संयुक्त कार्रवाई की जरूरत है.