दरभंगा सकतपुर थाना कांड संख्या 85/25 में नाबालिग पीड़िता पर सुलह का दबाव आरोपियों के सहयोगी लगातार धमका रहे हैं, मां बोलीं– “हम सुलह नहीं करेंगे”

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दरभंगा। सकतपुर थाना क्षेत्र के कुरसो गांव की नाबालिग शालू कुमारी और उनकी मां शीला देवी इन दिनों भय और दबाव के माहौल में हैं। गंभीर हमले की शिकार शालू कुमारी के मामले में, आरोप है कि अभियुक्तों के सहयोगी लगातार परिवार को अदालत में समझौता करने के लिए दबाव बना रहे हैं।

अदालत तक दबाव

शीला देवी ने मौखिक रूप से कहा कि अभियुक्त पक्ष कई दिनों से धमकी और प्रलोभन दे रहा है कि केस वापस ले लो, अन्यथा उल्टे तुम्हारे खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि बीते शनिवार को दबाव के कारण वे दरभंगा अदालत तक गईं, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया पूरी न हो पाने से अभियुक्तों का जमानत प्रार्थना पत्र और सुलह का कागज सम्मिलित नहीं हो सका। अदालत ने सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

रविवार को भी, शीला देवी के अनुसार, आरोपियों के सहयोगियों ने उन पर दबाव बनाया कि सोमवार को अदालत में जाकर समझौते के कागज पर हस्ताक्षर कर दें। लेकिन शीला देवी ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगी।

विवादित वीडियो और पक्षों के बयान

इसी बीच, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो और मोबाइल बातचीत में शीला देवी ने भाजपा मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम झा, विवेक सहित अन्य पर केस वापसी के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर, पुरुषोत्तम झा और अन्य ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि शीला देवी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। उनके अनुसार, वे केवल स्पष्टीकरण देने शीला देवी के घर पहुंचे थे, उसी दौरान पुलिस भी वहां मौजूद थी। झा ने यह भी कहा कि रविवार को पुलिस के सामने शीला देवी ने उनके नाम का दबाव डालने संबंधी उल्लेख नहीं किया।

धमकी और पुलिस की भूमिका

शीला देवी का आरोप है कि अभियुक्त अपने प्रभावशाली ग्रामीण सहयोगियों की मदद से उन्हें लगातार धमका रहे हैं और यहां तक कि बिना किसी लिखित आवेदन के पुलिस को बुलाकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। उनका कहना है कि पुलिस ने मौके पर आकर केवल “मना” किया, लेकिन किसी भी आरोपी अथवा सहयोगी पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की।

मामला गंभीर, पर कार्रवाई अधूरी

गौरतलब है कि 27 जुलाई को दर्ज इस मामले में नाबालिग शालू कुमारी के साथ क्रूरता किए जाने का आरोप है। प्राथमिकी में कहा गया है कि गुप्तांग पर लात-घूसों से वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। पीड़िता को डीएमसीएच में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसे दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया और ऑपरेशन भी हुआ। चिकित्सकों ने बताया कि अब उसका मां बनने की संभावना धूमिल हो गई है।

बड़ा सवाल

इतने गंभीर मामले और लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं—

आखिर अब तक नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?

मेडिकल रिपोर्ट को केस डायरी में क्यों नहीं जोड़ा गया और पोक्सो अधिनियम की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं?

आरोपी खुलेआम घूमते हुए भी गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?

पीड़िता की मां शीला देवी ने वरीय पुलिस अधिकारियों और बाल कल्याण विकास पदाधिकारी से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।