उप्र/सहारनपुर रामपुर मनिहारानजमीयत उलेमा ए हिन्द के कार्यकारिणी सदस्य हजरत मौलाना शमशीर कासमी ने कहा कि कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी करना ही सबसे अफजल है कुर्बानी के दौरान दूसरों की भावनाओं का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।

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रिपोर्ट वैभव गुप्ता।


जमीयत उलेमा ए हिन्द के कार्यकारिणी सदस्य व मदरसा जामिया दावतुल हक मुईनिया चर्रोह के प्रबंधक मौलाना शमशीर कासमी ने कहा कि कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है जो हमारे नबी से हम तक पहुँची है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी करना ही सबसे अफजल है इसका कोई बदल नही है। जो लोग कुर्बानी का बदल बताते हैं वो गलत हैं।
अगर कोई सदका और गरीबों की मदद करना चाहे वो अलग
से करे। कुर्बानी का इससे कोई ताल्लुक नहीं। इसलिए हर साहिबे हैसियत कुर्बानी करे।
मौलाना शमशीर कासमी ने कहा कि कुर्बानी में किसी तरह का दिखावा मुनासिब नहीं है। साफ सफाई बहुत जरूरी है। कुर्बानी के बाद बचे अवशेष सड़कों पर या इधर उधर न फेंके बल्कि जमीन में दबा दें। सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी न करें बल्कि पर्दे के एहतिमाम करें। कुर्बानी के बाद गरीबों को अपने हिस्से में से तकसीम करें। उन्होंने कहा कि दूसरों की भावनाओं का पूरी तरह सम्मान करें क्योंकि अच्छा अलखाक मुसलमान की पहली पहचान है। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि कुर्बानी का कोई भी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर ना डालें यह सरासर गलत है।