
जिले को वर्ष 2026 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी श्री कुमार गौरव ने समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा प्रस्तुत जुलाई 2026 की मास्टर रिपोर्ट के विभिन्न सूचकांकों की प्रखंडवार समीक्षा की गई तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों की सराहना करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले प्रखंडों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन है। प्रत्येक संभावित मरीज की समय पर पहचान, जांच, उपचार तथा पोषण सहायता सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी संभावित टीबी रोगी की जांच अथवा उपचार में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 2,21,896 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की गई। इनमें 64,855 व्यक्तियों में टीबी के संभावित लक्षण (Achieved) पाए गए। संदिग्ध मरीजों की पुष्टि के लिए 13,747 एक्स-रे किए गए, जबकि 4,009 एक्स-रे रिपोर्ट प्राप्त हुईं। इसी प्रकार 5,718 एनएएटी (NAAT) जांच की गई तथा 207 जांच रिपोर्ट उपलब्ध हुईं। इसके अतिरिक्त डिफरेंशियल टीबी के 3,679 परीक्षण, टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (TPT) के 1,824 मामलों, निक्षय मित्र योजना के अंतर्गत 272 उपलब्धियां तथा 230 मरीजों को सहयोग उपलब्ध कराया गया। वहीं फूड बास्केट योजना के तहत 226 मरीजों को लाभ पहुंचाया गया तथा 81 नए लाभार्थियों को जोड़ा गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी प्रखंडों में स्क्रीनिंग अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा जिन मरीजों में टीबी के लक्षण दिखाई दें, उनकी जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि जांच में विलंब होने से संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में जांच एवं रिपोर्टिंग की सतत निगरानी आवश्यक है।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि कटरा, पारू, औराई, सकरा, बंदरा, कुढ़नी, मीनापुर एवं साहेबगंज जैसे प्रखंडों में स्क्रीनिंग एवं जांच का कार्य अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। वहीं जिन प्रखंडों में एक्स-रे, एनएएटी जांच अथवा रिपोर्टिंग की संख्या कम रही, वहां विशेष अभियान चलाकर प्रदर्शन में सुधार लाने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। सभी मरीजों को नियमित दवा, पोषण सहायता, निक्षय पोर्टल पर समय पर प्रविष्टि तथा फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निक्षय मित्र योजना को और अधिक मजबूत बनाने पर बल देते हुए कहा कि सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, उद्योगों तथा सक्षम नागरिकों को इस अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में जिलाधिकारी ने प्रत्येक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि आशा कार्यकर्ता, एएनएम एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण कर संभावित मरीजों की पहचान करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, वजन कम होना, बुखार अथवा रात में पसीना आने जैसी समस्या हो तो उसकी तत्काल टीबी जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एक्स-रे एवं एनएएटी जांच की उपलब्धता का नियमित मूल्यांकन किया जाए तथा जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराई जाए। जिन प्रखंडों में उपलब्धियां कम हैं, वहां विशेष मॉनिटरिंग करते हुए प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि टीबी उन्मूलन अभियान में डेटा की शुद्धता, समय पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग तथा मरीजों की ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान की सफलता के लिए पंचायत स्तर तक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि लोग टीबी के लक्षणों को छिपाने के बजाय समय पर जांच कराएं और उपचार पूरा करें।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी श्री कुमार गौरव ने कहा कि “टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। समय पर पहचान, नियमित दवा और जनसहयोग से मुजफ्फरपुर को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है। सभी अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें तथा प्रत्येक पात्र मरीज तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें।”
बैठक में सिविल सर्जन, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी, जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारी, सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
