
स्थानीय जैन अतिथि भवन में परम पूज्य आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज के पावन सानिध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित जैनामृत शिक्षण शिविर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। शिविर में बच्चे, युवा, महिलाएं एवं बुजुर्ग उत्साहपूर्वक सहभागिता कर जैन धर्म के सिद्धांतों एवं आध्यात्मिक जीवन के विविध आयामों का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
शिविर को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज ने 14 गुणस्थानों का अत्यंत सरल, रोचक एवं विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि 14 गुणस्थान आत्मा की आध्यात्मिक उन्नति के क्रमिक सोपान हैं, जिनके माध्यम से जीव मिथ्यात्व से सम्यक्त्व और अंततः मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चरित्र को अपनाए, तो आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

आचार्य श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं से धर्म को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उसे अपने दैनिक जीवन में आचरण के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी प्रवचनों से उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
इस अवसर पर जैन समाज के प्रधान मनोज जैन, महामंत्री निपुण जैन, डॉ. राजेश जैन, संजय जैन, शशांक जैन, अमित जैन, शुभम जैन, आर्जव जैन, भूपेंद्र जैन, अभिषेक जैन, प्रदीप जैन ‘कन्नू’, नीरज जैन, श्याम लाल जैन, आकाश जैन सहित जैन समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
