
- क्षतिग्रस्त भारत-नेपाल सीमा स्तंभों की मरम्मत अंतिम चरण में
मोतिहारी ।
पूर्वी चंपारण से सटी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सीमा स्तंभों की मरम्मत का कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की निगरानी में यह कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पूर्वी चंपारण की 137 किलोमीटर लंबी सीमा पर कुल 1237 सीमा स्तंभ स्थापित हैं। इनमें 931 स्तंभ अच्छी स्थिति में पाए गए, जबकि 73 क्षतिग्रस्त स्तंभों की मरम्मत कर दी गई है।
सीमा क्षेत्र से गायब हुए 233 भारतीय सीमा स्तंभों के स्थान पर नए स्तंभ लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। फिलहाल इन स्थानों को चिह्नित कर बांस लगाए गए हैं और अंतिम सर्वे रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सीमा पर अतिक्रमण, आपराधिक गतिविधियों और स्तंभों की स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया एवं सर्वे ऑफ नेपाल की संयुक्त टीम पिछले तीन महीनों से तथ्य आधारित सर्वेक्षण कर रही है। सर्वे पूरा होने के बाद पुनर्स्थापन का कार्य शुरू होगा।
- बैठक में बनी थी कार्ययोजना
25 मार्च को रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा सर्वेक्षण एवं सीमा स्तंभों के रखरखाव को लेकर पहली फील्ड सर्वे टीम (एफएसटी) की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा प्रबंधन और सर्वेक्षण संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की थी।
बैठक में किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के नेतृत्व में एसएसबी, वन विभाग तथा नेपाल के अधिकारियों ने संयुक्त रणनीति तैयार की।
-नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी उठाया सीमा विवाद का मुद्दा
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (शाह) ने दावा किया है कि नेपाल ही नहीं बल्कि भारतीय क्षेत्र पर भी कब्जे के मामले मौजूद हैं। उन्होंने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी विवाद को दोनों देशों के संबंधों का संवेदनशील मुद्दा बताया और विशेषज्ञों की मदद से समाधान निकालने की वकालत की।
-डीएम बोले, सर्वे पूरा होते ही लगाए जाएंगे नए पिलर
पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर क्षतिग्रस्त स्तंभों की मरम्मत का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण की रिपोर्ट मिलते ही गायब सीमा स्तंभों का पुनर्स्थापन किया जाएगा। वर्ष 2025-26 की स्वीकृत कार्ययोजना के तहत सीमा प्रबंधन, सर्वेक्षण और पुनर्निर्माण का कार्य जारी है।
