चंपारण की खबर::कोर्ट में चल रही थी बेल की सुनवाई और ‘नशा मुक्ति केंद्र’ में दम तोड़ चुका था कैदी!

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विरोध में परिजनों ने किया हंगामा और पुलिसिया कार्यशैली के खिलाफ की नारेबाजी

डीएम ने मौत के कारणों की जांच के लिए मेडिकल टीम को लगाया, मांगा रिपोर्ट

चार अनाथ बच्चों और बेवा पत्नी के आंसुओं का हिसाब कौन देगा?

मोतिहारी , राजन द्विवेदी।

जिले में खाकी और सिस्टम की कार्यशैली का एक और गलत परिणाम सामने आया है। जिसके कारण एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया है। इसे इत्तेफाक कहें या साजिश, जिस वक्त मोतिहारी व्यवहार न्यायालय में एक विचाराधीन कैदी की रिहाई के लिए बेल की सुनवाई चल रही थी और न्यायाधीश पुलिस से केस डायरी की मांग कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वह कैदी सदर अस्पताल के वार्ड में अपनी आखिरी सांसें गिन चुका था। उसकी मौत की खबर सुनते ही उसके परिजनों एवं शुभचिंतकों का हुजूम सदर अस्पताल में उमड़ पड़ा और जम कर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। बाद में डीएसपी दिलीप कुमार ने आक्रोशित लोगों को न्याय का भरोसा दिलाते हुए शांत कराया। वहीं जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल टीम से उसकी मौत मामले की गहन जांच करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट मांगा है।

गिरफ्तारी से मौत तक का खेल’

जानकारी के अनुसार हरसिद्धि थाना क्षेत्र के घियूढार पंचायत निवासी 35 वर्षीय अच्छे लाल पासवान को पुलिस ने 5 अप्रैल 2026 को शराब बेचने के एक पुराने मामले (कांड संख्या 124/2025) में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद हरसिद्धि पीएचसी में उसकी मेडिकल जांच हुई, जहां डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह फिट और स्वस्थ’ बताया।
बीते 6 अप्रैल को उसे जेल भेज दिया गया, लेकिन जेल पहुंचते ही रात 9 बजे उसे अचानक सदर अस्पताल के ‘नशा मुक्ति केंद्र’ में रेफर कर दिया गया। सवाल यह है कि जब वह बीमार नहीं था, तो उसे नशा मुक्ति वार्ड में क्यों ठूंसा गया?

दरिंदगी की गूंज: “साहब! मत मारो, घर में शादी है”

परिजनों और अस्पताल के प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि जुल्म का नतीजा है। वार्ड की खिड़कियों से अच्छे लाल की चीखें सुनाई देती थीं। वह चिल्लाता था,”मेरे भतीजे की शादी है, मुझे छोड़ दो, मुझे मत मारो।” लेकिन उन ‘दरिंदों’ का दिल नहीं पसीजा। पत्नी माला देवी का आरोप है कि पुलिस ने थाने से लेकर अस्पताल के वार्ड तक उसे बेरहमी से पीटा गया जिससे उसकी जान चली गई।

कोर्ट में आर्डर, अस्पताल में मातम

आज 9 अप्रैल को जब मोतिहारी कोर्ट में अच्छे लाल की बेल पर सुनवाई हो रही थी, वकील दलीलें दे रहे थे और जज साहब पुलिस से केस डायरी मांग रहे थे, तब तक अच्छे लाल का शरीर ठंडा पड़ चुका था। पुलिस को जिस डायरी को कोर्ट में पेश करना था, वह शायद अब इस ‘कथित हत्या’ के राज को छुपाने की कोशिश करेगी।

सवाल कि इसका जिम्मेदार कौन?

अगर मेडिकल रिपोर्ट में कैदी स्वस्थ था, तो उसे जेल के बजाय सीधे नशा मुक्ति वार्ड में क्यों भेजा गया?
क्या कैदी की मौत लापरवाही से हुई या फिर नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर वहां ‘मौत का तांडव’ चल रहा था?

सदर अस्पताल बन गया था रणक्षेत्र, एसडीएम और डीएसपी ने समझाया

घटना के बाद सदर अस्पताल रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। ग्रामीणों और परिजनों के भारी आक्रोश को देखते हुए सदर एसडीओ और डीएसपी दिलीप कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाकर किसी तरह मामले को शांत कराया। जिला पदाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड के नेतृत्व में पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगी कि अच्छे लाल की मौत बीमारी से हुई या सिस्टम की लाठियों से।