जहरीली शराब कांड: शराब धंधेबाजों के बीच इथेनॉल की आपूर्ति पर उठे सवाल

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  • मौतों का आंकड़ा 10 पर पहुंचा, 1300 लीटर मिथाइल अल्कोहल बरामद

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

सस्ती नशे की चाहत में लोग अनजाने में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। नतीजतन पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया प्रखंड क्षेत्र में बीते 2 अप्रैल से अब तक दस लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। दो दर्जन लोग बीमार हैं। जबकि छह लोगों के आंखों की रोशनी छीन गई है। पुलिस प्रशासन एवं मद्यनिषेध विभाग की टीम ने इस जहरीली शराब कांड के बाद खुब सख्ती दिखाई है। करीब एक दर्जन लोगों को जहरीली शराब के धंधेबाजों को गिरफ्तार भी किया है। एसआईटी ने 13 सौ लीटर इथेनॉल ( मिथाइल) को जब्त कर हजारों लोगों की जान बचा ली है। लेकिन, अहम सवाल यह है कि इथेनॉल ( मिथाइल) की आपूर्ति शराब के धंधेबाजों को कैसे हुई, जिससे मौत का यह तांडव हुआ।
बता दें कि घटना में प्रयुक्त 1300 लीटर मिथाइलं ( इथेनॉल, न कि मेथनॉल) अल्कोहल बरामद किया गया है। जिसका उपयोग ईंधन निर्माण और बिहार में कृषि उत्पादन मामले में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में किया जाता है।

  • मिथाइल का कहां, कैसे और क्यों होता है निर्माण

बिहार में एथेनॉल (इथेनॉल, न कि मेथनॉल) का उत्पादन राज्य में स्थापित नई और आधुनिक फैक्ट्रियों से हो रहा है। ये फैक्ट्रियां मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और टूटे चावल (Broken Rice) का उपयोग करती हैं। प्रमुख उत्पादक केंद्र पूर्णिया, मोतिपुर (मुजफ्फरपुर) और जमुई (अंकुर वाई-कॉम प्राइवेट लिमिटेड) है। जहां बड़े पैमाने पर मक्का व टूटे चावल से एथेनॉल बनाया जा रहा है।
बिहार में एथेनॉल उत्पादन के
प्रमुख क्षेत्र में जमुई (चकाई) है ।यहाँ एशिया का सबसे बड़ा अनाज-आधारित एथेनॉल प्लांट स्थापित हो रहा है।
पूर्णिया में भी मक्का-आधारित एथेनॉल उत्पादन इकाइयां कार्यरत हैं। बियाडा के अनुसार मोतिपुर (मुजफ्फरपुर) में पहले से ही एथेनॉल इकाइयां काम कर रही हैं।
बताया जाता है कि केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव के कारण, बिहार की एथेनॉल फैक्ट्रियों को मांग में कमी और संचालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल, एथेनॉल पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। मेथनॉल एक अलग प्रकार का अल्कोहल है।

बिहार के जमुई में एशिया की सबसे बड़ी अनाज आधारित इथेनॉल फैक्ट्रीस्थापित होने जा रही है। जिसे अंकुर वाई-कॉम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का 4,000 करोड़ के निवेश का अनुमान है।
वहीं पेट्रोलियम कंपनियों को 70% एथेनॉल खरीद की अनुमति दी गई है।
जानकार बताते हैं कि इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
मेथेनॉल एक सरल एल्कोहल है जिसका रासायनिक सूत्र CH A 3 OH है।

-फारेंसिक जांच रिपोर्ट व मृतकों की सूची

फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि अवैध शराब के कारोबारियों द्वारा लोगों को मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) युक्त जहरीली शराब परोसी गई, जिसके सेवन से यह दर्दनाक घटनाएं हुईं।
इस हादसे में जयसिंहपुर पुलवाघाट के चंदू प्रसाद, परसौना के प्रमोद यादव और परिक्षण मांझी, बालगंगा के सम्पत साह, हरदिया के हरी भगत, लालकिशोर राय, विनोद साह, मुसहरी टोला के लड्डू साह तथा शंकरसरैया के मोहम्मद इलियास एवं योद्धा मांझी की मौत हो चुकी है। विनोद साह और योद्धा मांझी की मौत रविवार को हुई।
पुलिस और मद्यनिषेध विभाग ने संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 50 जरकिन में बंद करीब 1300 लीटर मिथाइल अल्कोहल बरामद किया है। प्रत्येक जरकिन में लगभग 26 लीटर रसायन भरा हुआ था। फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि बरामद रसायन और पीड़ितों द्वारा सेवन की गई शराब एक ही प्रकार की है।

  • पेंट थिनर, एंटीफ्रीज और अन्य औद्योगिक उत्पादों में होता है उपयोग

विशेषज्ञों के अनुसार, मेथनॉल एक अत्यंत विषैला रसायन है, जिसमें सायनाइट की तरह के गुण होते हैं। इसका उपयोग पेंट थिनर, एंटीफ्रीज और अन्य औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यह रंगहीन होता है और इसकी गंध सामान्य शराब (एथिल अल्कोहल) जैसी होती है, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। महज 25 मिलीलीटर मेथनॉल का सेवन भी जानलेवा साबित हो सकता है। इसके प्रभाव से मतली, उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अंधापन और अंततः मृत्यु हो सकती है। मिथाइल अल्कोहल, शराब का ही बाई प्रोडक्ट है। सामान्य शराब से इसकी कीमत सस्ती होती है, इस कारण सहज रूप से उपलब्ध भी हो जाती है। खासकर एशियाई देशों में इसका मादक पदार्थों के निर्माण में अवैध इस्तेमाल होता है। कुछ विकसित देशों में इसका इस्तेमाल पेय पदार्थों की मादकता को विस्तार देने के लिए भी किया जाता है।