चंपारण शिक्षा::एमजीसीयू में “समावेशी पर्यटन अर्थव्यवस्था” पर विशेष व्याख्यान आयोजित

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विद्यार्थियों को पर्यटन के नए आयामों की मिली जानकारी

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा “समावेशी पर्यटन अर्थव्यवस्था” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में जैन विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के सहायक प्रोफेसर डॉ. शिवम भारतीय ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में प्रबंधन विज्ञान विभाग के एमबीए द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर तथा खाद्य एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अपने व्याख्यान में डॉ. शिवम भारतीय ने समावेशी पर्यटन अर्थव्यवस्था की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट करते हुए कहा कि आज पर्यटन केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक समावेशन, स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण और सतत विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि समावेशी पर्यटन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन से होने वाले लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे, विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों, छोटे उद्यमियों, स्थानीय कारीगरों और महिलाओं तक।


उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि यदि स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और पारंपरिक ज्ञान को पर्यटन से जोड़ा जाए तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पर्यटन क्षेत्र में सतत एवं उत्तरदायी पर्यटन की अवधारणा तेजी से महत्व प्राप्त कर रही है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संसाधनों का संतुलित उपयोग तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष बल दिया जाता है।
डॉ. भारतीय ने विद्यार्थियों को पर्यटन प्रबंधन, ग्रामीण पर्यटन, पारिस्थितिकी पर्यटन, डिजिटल पर्यटन विपणन तथा पर्यटन नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक करियर संभावनाओं की जानकारी दी और उन्हें इस क्षेत्र में नवाचार तथा उद्यमिता के लिए प्रेरित किया।
इस विशेष व्याख्यान का आयोजन प्रबंधन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र सिंह की पहल पर किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने डॉ. शिवम भारतीय का स्वागत करते हुए उनका संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया तथा विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में समावेशी पर्यटन विकास की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं, जिनका लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. सपना सुगंधा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यटन उद्योग आज विश्व के सबसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में शोध, नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर प्रबंधन विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार तथा अतिथि संकाय डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. राजीव रंजन और श्री बाला भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. शिवम भारतीय ने विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।