
चंपारण की खबर::
जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अधिकारी और बैंककर्मियों के खिलाफ होगी कार्रवाई: राधामोहन सिंह
– जिले में विकास की सुस्त रफ्तार पर सख्त दिखे सांसद, लगाई फटकार
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
समाहरणालय स्थित डॉ. राधा कृष्णन भवन के सभागार में बुधवार को आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलसीसी ) की बैठक में विकास की सुस्त रफ्तार को लेकर सांसद सह पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का रौद्र रूप देखने को मिला। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति बैंकों के उदासीन रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और बैंक कर्मियों के खिलाफ अब नरमी नहीं बरती जाएगी।
– सांसद ने कहा-कारण बताओ या कर्ज दो
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद राधा मोहन सिंह ने बैंक प्रबंधकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत आने वाले ऋण आवेदनों को फाइलों में दबाकर रखने की संस्कृति अब नहीं चलेगी। उन्होंने एक डेडलाइन तय करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में आवेदन 15 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहने चाहिए। सांसद ने कड़े लहजे में कहा, “अगर कोई बैंक किसी पात्र व्यक्ति का आवेदन निरस्त करता है, तो उसे इसका ठोस और लिखित कारण आवेदक को बताना होगा। बिना किसी वाजिब कारण के जनता को परेशान करने और चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों पर अब जिला प्रशासन के माध्यम से सीधी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि बैठकों में होने वाले निर्णय केवल कागजों की शोभा न बढ़ाएं, बल्कि उनका असर धरातल पर दिखना चाहिए। बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 की तृतीय तिमाही (दिसंबर 2025 तक) की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान जिले का साख-जमा अनुपात (सीडी रेसीवो) 79.19% दर्ज किया गया, जिसे समिति ने संतोषजनक माना। अलग-अलग बैंकों के प्रदर्शन में भारी विसंगति देखी गई।
बैठक में इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यों की सराहना की गई। वहीं दूसरी ओर, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से काफी नीचे रहा, जिस पर सांसद ने नाराजगी व्यक्त की। सबसे अधिक गाज बंधन बैंक पर गिरी, जिसका प्रदर्शन लक्ष्य के मुकाबले बेहद निराशाजनक पाया गया। खराब प्रदर्शन करने वाले प्रबंधकों को ‘सुधार या कार्रवाई’ की स्पष्ट चेतावनी दी गई।
बैठक में उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना जैसी महत्वपूर्ण स्वरोजगार योजनाओं की बैंकवार समीक्षा की। उन्होंने उन शाखाओं के प्रबंधकों को आड़े हाथों लिया जिनका प्रदर्शन अब तक ‘शून्य’ है। डीडीसी ने निर्देश दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन, मत्स्य पालन और गव्य विकास के तहत केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) वितरण में तत्काल तेजी लाई जाए, ताकि युवाओं और किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
इस उच्च स्तरीय बैठक में बेतिया सांसद प्रतिनिधि प्रदीप सर्राफ, शिवहर सांसद प्रतिनिधि चन्द्रशेखर सिंह, नगर उप महापौर लाल बाबू प्रसाद और बैंकिंग क्षेत्र के कई दिग्गज शामिल थे। इनमें बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मनीष कुमार, आरबीआई के एलडीओ, नाबार्ड के डीडीएम और अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) राजेन्द्र कुमार पाण्डेयच प्रमुख थे। कार्यक्रम का समापन एलडीएम राजेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सांसद और प्रशासन को आश्वस्त किया वि निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
