उप्र/सहारनपुर मंडल की 19 चीनी मिलों पर बकाया है 755 करोड़ रुपये का भुगतान

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किसानों ने कहा गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये कुंतल तय होने तक संघर्ष रहेगा जारी,


ब्यूरो रिपोर्ट सहारनपुर।


सहारनपुर।
किसानों की आर्थिक दिक्कतों और गन्ना भुगतान संकट को लेकर भारतीय किसान यूनियन वर्मा एवं पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा के नेतृत्व में किसानों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मंडल आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के लिए तैयार ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि लगातार बढ़ती लागत और समय पर भुगतान न मिलने से किसान भारी संकट से गुजर रहे हैं।भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल गन्ना है, लेकिन किसानों को लागत के बराबर कीमत भी नहीं मिल पा रही। स्वामीनाथन आयोग के सीटू +50% फार्मूले के अनुसार गन्ने का लाभकारी मूल्य 825 रुपये प्रति कुंतल बनता है, इसके बावजूद सरकार ने केवल 30 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे बड़े निर्णय की तरह प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 3 रुपये प्रति कुंतल दुलाई किराया बढ़ाना भी किसान हित की बजाय औपचारिकता भर है।


उन्होंने बताया कि शुगर कंट्रोल ऑर्डर 1966 के अनुसार जिन मिलों पर भुगतान बकाया है, वे दुलाई किराया नहीं काट सकतीं, जबकि कई मिलें यह नियम तोड़ रही हैं। वर्मा ने जानकारी दी कि मंडल की 19 चीनी मिलों पर 755 करोड़ रुपये का चालू बकाया है, जबकि पिछले वर्षों के देरी के भुगतान पर 1800 करोड़ रुपये ब्याज भी अटका पड़ा है। सहारनपुर जिले की 7 चीनी मिलों पर इस वर्ष के 221 करोड़ रुपये और पिछले सीजन के 93 करोड़ रुपये अब तक नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि विभागीय उदासीनता के कारण किसानों में गहरी नाराजगी है।ज्ञापन में कहा गया कि किसानों के कर्ज समाप्त किए जाएं, फसलों के लाभकारी मूल्य की गारंटी हो, मनरेगा को खेती से जोड़कर श्रमिक उपलब्ध कराए जाएं, बुजुर्ग किसानों को पेंशन मिले और राष्ट्रीय किसान आय आयोग का गठन किया जाए। इसके अलावा गन्ने का मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने, सभी बकाया भुगतान व ब्याज तुरंत जारी कराने, मिलों में घटतौली रोकने, शिक्षा–चिकित्सा को निशुल्क करने और सभी टोल टैक्स खत्म करने की मांग भी की गई।राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अशोक मलिक ने कहा कि किसानों की आय बढ़े बिना देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने घटतौली में लिप्त मिल मालिकों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत बताई।प्रतिनिधिमंडल में राजेंद्र चौधरी, रामचंद्र गुर्जर, पंडित नीरज कपिल, दुष्यंत सिंह, धर्मवीर चौधरी, ओंकार सिंह एडवोकेट आदि मौजूद रहे।