
कस्बे में बड़े जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य मुनि भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक समृद्धि धन, वैभव और बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि शुद्ध विचार, संयम, सदाचार और संस्कारों से होती है। जीवन में विवेक, आत्मसंयम और नैतिक मूल्यों को अपनाने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में समृद्ध कहलाता है। आत्मकल्याण के लिए धर्म, तप, त्याग और सद्विचारों को जीवन का आधार बनाना चाहिए। अच्छे संस्कार व्यक्ति के जीवन को सफल और समाज को श्रेष्ठ बनाते हैं।

नगर के श्री सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित धर्मसभा में जैन मुनि आचार्य श्री भारत भूषण जी महाराज महाराज ने कहा कि जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य का वास्तविक वैभव उसके घर, धन या बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि उसके विवेक, संस्कार और शुद्ध विचारों से मापा जाता है। मनुष्य की झोपड़ी कैसी भी हो, लेकिन उसकी सोच बड़ी अच्छी होना चाहिए। मुनिश्री ने बताया कि छोटी झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति भी यदि सद्विचारों, संयम, करुणा और आत्मसंयम से युक्त है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है, जबकि दूषित विचारों वाला व्यक्ति महलों में रहकर भी सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता।
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
