
– अब शोध और कौशल विकास को मिलेगी नई उड़ान
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी और केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, धर्मशाला के बीच शैक्षणिक, शोध और कौशल विकास सहयोग के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। एमओयू का उद्देश्य दोनों केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, ज्ञान साझेदारी, उद्यमिता और संकाय-छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
एमओयू पर एमजीसीयू के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव और सीयूएचपी के कुलपति प्रो. डॉ. सत प्रकाश बंसल ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रम चलाएंगे। सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, प्रशिक्षण, समर स्कूल, व्याख्यानमाला और संकाय विकास कार्यक्रमों का आयोजन कर ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता और विशेषज्ञता के आधार पर संकाय सदस्यों व विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी होगा, जिससे विद्यार्थियों को विविध शैक्षणिक दृष्टिकोण और नई शोध प्रवृत्तियों को समझने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा दोनों संस्थान पुस्तकें, शोध पत्रिकाएं, शिक्षण-सामग्री, रिपोर्ट और ऑडियो-विजुअल संसाधन साझा करेंगे ताकि शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को गति मिले।
कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह एमओयू शैक्षणिक नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह सहयोग शोध, क्षमता निर्माण और समग्र विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के बीच ऐसी साझेदारी ज्ञान सृजन और उत्कृष्टता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
एमओयू से दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और शोधार्थियों में उत्साह है। उनका मानना है कि इससे उच्च शिक्षा और शोध का माहौल और बेहतर होगा।
