
मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी) जिले में कानून व्यवस्था को और दुरुस्त करने तथा निर्दोषों को राहत देने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अक्सर यह देखा जाता है कि आपसी रंजिश या विवादों में लोग जानबूझकर दूसरे पक्ष के नाबालिग बच्चों या बुजुर्गों का नाम भी केस में घसीट लेते हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए एसपी ने जिले के सभी एसडीपीओ, अंचल निरीक्षकों (सीआई) और थाना प्रभारियों (एसएचओ) को साफ निर्देश दिया है कि प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करते समय ही उम्र का पूरी तरह से सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी हाल में अनावश्यक रूप से नाबालिग बच्चों या वृद्ध जनों पर मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए। अगर किसी अधिकारी द्वारा इस आदेश की अनदेखी की गई, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे मुकदमों के पर्यवेक्षण (सुपरविज़न) के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी निर्दोष बच्चे या बुजुर्ग का नाम केस में न रहे।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर बढ़ते रील्स और दिखावे के चलन को देखते हुए भी एसपी स्वर्ण प्रभात ने एक और बड़ा फैसला लिया है। इन दिनों कई लोग एयरगन या खिलौने वाले बंदूक (टॉयगन) के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। एसपी ने कहा कि ऐसे हथियारों के प्रदर्शन से आम जनता के मन में बेवजह दहशत और समाज में अराजकता का माहौल पैदा होता है। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने आदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह का दिखावा करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए, ताकि समाज में शांति व्यवस्था कायम रह सके।
