
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
अखिल भारतीय सोहम महामंडल शाखा सोना अर्जुनपुर के तत्त्वावधान में चल रहे सप्तदिवसीय सत्संग के द्वितीय दिवस सोहं पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने कहा कि श्रेय व प्रेय दोनों हर व्यक्ति के जीवन में आते हैं धीर पुरुष कल्याण मार्ग का अनुशरण करता है। जबकि अविवेकी अपने योगक्षेम के लिए प्रेय मार्ग का अनुशरण करता है। यद्यपि कल्याण वाले मार्ग पर चलने पर बहुत परेशानी होती है।बहुत परीक्षाएं देनी होती हैं ।किंतु परिणाम सुखद होता है।जबकि प्रेय मार्ग में प्रारम्भ में सुख होता है परंतु परिणाम उसका दुखद होता है। धीर पुरुष जैसा मार्ग चुनते हैं उसी श्रेय मार्ग पर चलने में ही हम सब की भलाई है।
प्रवचनों की श्रृंखला में श्री स्वामी प्रीतमदास स्वामी प्रणवानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी शिवानंद और स्वामी गोपालानन्द ने भी अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।
भागवत कथा में पंडित रामगोपाल शास्त्री ने कथा के द्वारा मुमुर्षु परीक्षित और शुक्रदेव संवाद सुनाया। अंत में गणमान्य लोगों ने सन्तों का सम्मान करके भगवान की आरती की।

