
– चंपारण के शिक्षा जगत एवं प्रबुद्ध लोगों में हर्ष का माहौल
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
बिहार सरकार शिक्षा विभाग के एसईआरटी ने बिहार के हिंदी माड्यूल निर्माण टीम में पूर्वी चंपारण जिले के दो शिक्षक राजीव कुमार झा एवं विनय कुमार सिंह को शामिल किया है। जिसके साथ ही पूर्वी चंपारण का शिक्षा जगत गौरवान्वित हुआ है।
बिहार शिक्षा विभाग ने पूर्वी चंपारण जिले के यूएचएस चंदनबारा उर्दू के प्रधानाध्यापक सोरपनिया, ढाका निवासी राजीव कुमार झा को एससीईआरटी , बिहार ने हिंदी विषय के कक्षा 6 से 8 के लिए मॉड्यूल निर्माण टीम में शामिल किया है। हिंदी विषय के इस मॉड्यूल निर्माण टीम में चार शिक्षकों/प्रवक्ता की टीम है। जिसमें पूर्वी चंपारण से दो शिक्षकों को यह मौका मिला है।राजीव के अतिरिक्त पूर्वी चंपारण से डॉ० विनय कुमार सिंह, रामउग्रह सिंह कुशवाहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जयसिंहपुर, तुरकौलिया,शामिल हैं।
राजीव जहां आधा दर्जन किताबों के लेखक भी हैं। जिसमें ” बंद पन्ने, जीरो नंबर, क्या लिखूं मैं, बोये हुए शब्द, डिबिया एवं बस्ते में चांद” प्रमुख है। वहीं विनय हिंदी के सुप्रसिद्ध आलोचक हैं।

बता दें कि एससीईआरटी ने ‘करके सीखो’ को इस बार अपने प्रशिक्षण का आधार बनाया है। प्रशिक्षण के ज़्यादातर सत्र परियोजना आधारित हैं एवं पाठ्य सामग्री को अधिक से अधिक रुचिकर बनाने के लिए अभिप्रेरित हैं।
मॉड्यूल को अंतिम रूप देकर बिहार के सभी प्रशिक्षण संस्थानों में हिंदी भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए भेजा है।
प्रकाशित मॉड्यूल की प्रस्तावना लिखते हुए बिहार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक दिनेश कुमार(भा.प्र.से.), ने प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं से सीधा संवाद किया है। वहीं मॉड्यूल की भूमिका संस्थान के उपनिदेशक संजय कुमार ने लिखी है।
श्री झा ने बताया कि यह मॉड्यूल शिक्षकों को “करके सिखाने” के लिए प्रेरित करेगा।मॉड्यूल का प्रारूप सटीक हुआ एवं संक्षिप्त है। जिसमें प्रशिक्षकों व शिक्षकों को अपनी मेधा का प्रदर्शन करने के लिए बहुत स्थान है।

विभाग एवं संस्थान का लक्ष्य है कि बच्चे कक्षा में ऊबे नहीं और इसके लिए उन्हें पाठ्य सामग्री से जोड़े रहना काफ़ी आवश्यक है। मॉड्यूल भी इसी कांसेप्ट पर आधारित है। चंपारण के शिक्षकों को मॉड्यूल निर्माण टीम में शामिल किए जाने पर क्षेत्र में प्रबुद्ध वर्ग एवं शिक्षाविदों में हर्ष का माहौल है।
